वेटरनरी विश्वविद्यालय पशुधन क्षेत्र में उत्पादकता में सुधार करने में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की भूमिका पर वेबिनार का आयोजन

बीकानेर 28 अगस्त। वेटरनरी विश्वविद्यालय के संघटक पी.जी.आई.वी.ई.आर, जयपुर स्थित आर.के.वी.वाई. परियोजना पशुजन्य रोग निदान, निगरानी एवं निवारण केन्द्र द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव भारत 75 के उपलक्ष में राजस्थान के संदर्भ में पशुधन क्षेत्र में उत्पादकता में सुधार करने में आर.के.वी.वाई. की भूमिका विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार के आयोजन सचिव प्रो. डॉ. धर्म सिंह मीना ने अतिथियों का स्वागत किया तथा उन्होंने बताया कि आजादी के 75वें साल में में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा भारत की आजादी के 75वें साल को उत्सव के रूप में मनाया जाए तथा विभिन्न क्षेत्रों में किये गये कार्यों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किये जाएं। वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. सतीश के. गर्ग ने कहा कि आर.के.वी.वाई. की सहायता से सभी केन्द्रीय एवं राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों ने अपने आधारभूत संरचना को मजबूत किया है, तथा विश्वविद्यालयों एवं कृषि, पशुपालन, गोपालन आदि विभागों ने मिलकर गरीब किसानों के विकास के लिए अच्छा कार्य किया है। वेटरनरी विश्वविद्यालय ने पिछले 10 सालों में लगभग सभी जिलों में अपनी पहुँच बनायी तथा पशुपालकों को फायदा पहुंचाया, स्नातकोत्तर पशु चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पशुजन्य रोग निदान, निगरानी एवं निवारण केन्द्र जैसे कई परियोजनाएं आर.के.वी.वाई. के सहयोग से ही बन पाई है। कुलपति प्रो. गर्ग ने कहा कि राजुवास आर.के.वी.वाई. के माध्यम से नई परियोजनाएं शुरू करेगा जिससे माननीय प्रधानमंत्री जी के किसान की आय दोगुनी करने के प्रयासों को सफल किया जा सकेगा। राजुवास के संस्थापक एवं पूर्व कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने राजस्थान के संदर्भ में पशुधन क्षेत्र में उत्पादकता में सुधार करने में आर.के.वी.वाई. की भूमिका पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया और बताया कि राज्य के विकास मे कृषि एवं पशुधन का विशेष महत्व है तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुपालन एक उत्प्रेरक का कार्य कर रहा है। आर.के.वी.वाई. के माध्यम से देश की 12वीं पंचवर्षीय योजना में देश की सभी कृषि एवं वेटरनरी विश्वविद्यालय में सबसे अधिक फंड आवंटित किया गया था जिससे आधारभूत संरचना का निर्माण हो सका। कार्यक्रम के अतिथि भास्कर ए. सावंत, आईएएस, प्रमुख शासन सचिव कृषि, उद्यानिकी एवं सहकारिता विभाग, राजस्थान सरकार ने कहा कि विष्वविद्यालयों को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत दिये गये फंड ज्यादा उपयोगी साबित हो रहे है विष्वविद्यालयों मे जो आधारभूत संरचना बनकर तैयार हुई है व अनुसंधान हो रहे है वो किसान, पशुपालक व आमजन को लंबे समय तक परिणाम देगे जिससे देष व प्रदेष के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रमुख शासन सचिव सावंत ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत पशुपालन क्षेत्र में लगभग बीस प्रतिशत फंड आवंटित किये गये है परंतु राजस्थान राज्य में पशुपालन क्षेत्र में अधिक फंड आवंटित किये जा रहे है जो कि राज्य सरकार के पशुपालन क्षेत्र को सुदृड़ करने की मंषा को जाहिर करता है। कार्यक्रम में भारत सरकार के पशुपालन आयुक्त डॉ. प्रवीण मलिक ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत संपूर्ण देश में पशुपालन के क्षेत्र में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी तथा भविष्य में इस योजना को जारी रखते हुए पशुपालन के क्षेत्र में अधिक फंड उपलब्ध कराये जाने का अनुरोध किया जिससे पशुपालन के क्षेत्र में नई-नई तकनीकों का विकास के माध्यम से बीमारियों निदान, निगरानी एवं निवारण किया जा सके। कार्यक्रम में कृषि आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश, आईएएस ने आर.के.वी.वाई. द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में अभी तक के बजट आवंटन को प्रदर्षित करते हुए भविष्य में इस क्षेत्र को अधिक प्राथमिकता देने को कहा। इस वेबिनार में पशुपालन विभाग के संयुक्त शासन सचिव श्रीमान लक्ष्मी कांत बालोत, गोपालन विभाग के निदेशक डॉ लाल सिंह, अधिष्ठाता, वेटरनरी कॉलेज बीकानेर के अधिष्ठाता प्रों आर.के. सिंह कार्यक्रम में सम्मिलित रहे। कार्यक्रम आयोजन समिति के अध्यक्ष व निदेशक अनुसंधान, प्रो. हेमन्त दाधीच, निदेशक प्रसार शिक्षा, प्रो. राजेष कुमार धूड़िया, निदेशक क्लिनिक्स, प्रो. ए.पी. सिंह, निदेशक पी.एम.ई. प्रो. अंजू चाहर, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, प्रो. सुभाष गोस्वामी, निदेशक मानव संसाधन विकास, प्रो. बी.एन. श्रृंगी, परीक्षा नियंत्रक, प्रो. उर्मिला पानू, डॉ. अशोक डांगी व विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। पी.जी.आई.वी.ई.आर, जयपुर की अधिष्ठाता प्रो. संजीता शर्मा ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. निर्मल कुमार जैफ एवं डॉ. लता शर्मा एवं डॉ. बरखा गुप्ता ने सहयोग किया।