वेटरनरी विश्वविद्यालय प्रवासी पक्षियों के स्वास्थ्य व आपात चिकित्सा पर पशुपालन विभाग के पशुचिकित्सकों का पाँच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

वेटरनरी विश्वविद्यालय
प्रवासी पक्षियों के स्वास्थ्य व आपात चिकित्सा पर
पशुपालन विभाग के पशुचिकित्सकों का पाँच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

बीकानेर, 9 जनवरी। प्रवासी पक्षियों के स्वास्थ्य और संक्रामक बीमारियों की आपात स्थिति पर पशुचिकित्सा अधिकारियों का 5 दिवसीय प्रशिक्षण शनिवार को समाप्त हो गया। राजुवास के मानव संसाधन विकास निदेशालय और वन्य जीव प्रबंधन एवं स्वास्थ्य अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ऑनलाइन प्रशिक्षण में पशुपालन विभाग के 24 पशुचिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया। पाँच दिवसीय प्रशिक्षण में कुल 17 विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये। प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम में कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वर्तमान परिपेक्ष्य में प्रवासी पक्षियों में होने वाली विभिन्न बीमारियों एवं आपात स्थितियों से सफलता पूर्वक समाधान हेतु पशुपालन विभाग के अधिकारियों का क्षमता एवं कौषल वर्धन करना है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा इस तरह की आपात स्थितियों के लिए फील्ड पषुचिकित्सकांे के ज्ञान व कौशल संवर्धन हेतु ई-कोर्स व प्रशिक्षणों का आयोजन किया जाएगा। प्रो. त्रिभुवन शर्मा, निदेशक मानव संसाधन विकास ने कहा कि यह प्रशिक्षण पूर्व निर्धारित सतत् शिक्षा का हिस्सा है एवं कोविड़-19 कि स्थिति मे ई-कोर्स पशुचिकित्सकों के लिए बहुत उपयोगी है। डॉ. आनन्द सेजरा, अतिरिक्त निदेशक पशुपालन विभाग ने अपने विचार रखते हुए कहा कि स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों में विभिन्न बीमारियों के प्रकोप के निदान एवं ईलाज हेतु वेटरनरी विश्वविद्यालय का पूरा सहयोग रहा है विभिन्न विभागो के संयुक्त प्रयासो से ही हम पक्षियों में विभिन्न बीमारियों पर काबू पा सकते हैं। डॉ. आर.के. सिंह, अधिष्ठाता वेटरनरी कॉलेज बीकानेर ने सभी प्रशिक्षणार्थियों एवं विशेषज्ञों का स्वागत किया। निदेशक अनुसंधान, प्रो. हेमंत दाधिच ने प्रशिक्षण समाप्ति पर सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डॉ. संजिता शर्मा, अधिष्ठाता पी.जी.आई.वी.ई.आर., जयपुर, डॉ. ए.पी. सिंह निदेशक क्लीनिक, डॉ. देवेंद्र सिंह राठौड़, वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी एवं अन्य प्रतिभागी मौजूद रहें । प्रशिक्षण के अंतिम दिन डॉ. दीपिका धूड़िया ने “वन हैल्थ, पक्षियों मे जुनोटिक रोगों का महत्व”, डॉ. रजनी जोशी ने “किटाणुशोधन तथा महामारी के समय शवों का उचित निस्तारण” तथा डॉ. बी.एन. श्रृंगी ने “पक्षियों मे रोग निदान हेतु उन्न्त सूक्ष्म जीव विज्ञान प्रयोगिक विधियां” विषयों पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये। प्रशिक्षण का संचालन डॉ. साकार पालेचा, प्रमुख अन्वेषक, वन्य जीव प्रबंधन एवं स्वास्थ्य अध्ययन केंद्र, बीकानेर एवं डॉ. अशोक डांगी, प्रभारी अधिकारी आई.यू.एम.एस. ने किया ।