वेटरनरी विश्वविद्यालय को नए पशु विज्ञान केंद्र की सौगात

वेटरनरी विश्वविद्यालय को नए पशु विज्ञान केंद्र की सौगात

बीकानेर, 29 मई। राज्य में पशुधन उत्पादकता बढ़ाने और पशुपालकों की आजीविका उन्नयन के लिए वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रसार कार्यक्रमों की महत्ता को देखते हुए राज्य सरकार ने एक नए पशु विज्ञान केंद्र को खोलने की सौगात वेटरनरी विश्वविद्यालय को दी है। राज्य में पशुपालन विकास एवं कल्याण के मद्देनजर विश्वविद्यालय द्वारा अन्य जिलो में पशु विज्ञान केंद्र खोले जाने के प्रस्ताव की उपयोगिता को देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री ने वर्ष 2021-22 की बजट घोषणा में जोबनेर में पशु विज्ञान केंद्र खोलने की घोषणा की थी। राज्य सरकार ने वेटरनरी विश्वविद्यालय के अन्तर्गत इस नए पशु विज्ञान केन्द्र की स्थापना की क्रियान्विति हेतु प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने बताया कि वेटरनरी विश्वविद्यालय के इस 16वें पशु विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए पदों की स्वीकृति एवं केन्द्र के भवन निर्माण कार्य, आवश्यक उपकरण व फर्नीचर की खरीद तथा कार्यालय व्यय हेतु वित्तीय स्वीकृति भी सरकार ने प्रदान की है। कुलपति प्रो. शर्मा ने बताया की इस स्वीकृति के साथ ही पशु विज्ञान केन्द्र हेतु भुमि आवंटन, निर्माण कार्य एवं अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं शीघ्र ही शुरू की जाएगी। वेटरनरी विश्वविद्यालय के अन्तर्गत नए पशु विज्ञान केन्द्र प्रारंभ हो जाने से इस क्षेत्र के पशुपालकों को सीधा लाभ मिल सकेगा। कोरोना काल में भी विश्वविद्यालय के द्वारा पशुपालकों व किसान भाइयों के लिए कई तरह के प्रसार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। राजुवास ई- पशुपालक चौपाल कोरोना महामारी में पशुपालकों की समस्याओं के समाधान का एकमात्र सहारा बनी है। विश्वविद्यालय के द्वारा कौशल विकास प्रशिक्षण अभियान के तहत पांच दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रारंभ किए गए हैं। इसके अतिरिक्त राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित पशु विज्ञान केंद्र द्वारा 90 व्हाट्सएप समूह बनाए गए हैं जिसमें किसानों व पशुपालकों को पशुपालन से संबंधित तकनीकी सलाहकार सेवाएं प्रदान की जा रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य के 15 जिलों में कार्यरत विश्वविद्यालय के पशु विज्ञान केन्द्र एक महत्वपूर्ण प्रसार अंग के रूप में पशुपालन प्रशिक्षण, सलाहकारी सेवा, तकनीकी हस्तान्तरण और रोग निदान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कार्य कर रहे है, साथ ही स्थानीय समस्याओं पर अनुसंधान एवं उनका समाधान जिलें में ही सम्भव हो ऐसे प्रयास किए जा रहे है।