राजुवास ई-पशुपालक चौपाल का आयोजन स्वदेशी गो नस्लो के उचित प्रबंधन से पा सकते है अधिक उत्पादन

बीकानेर, 10 नवम्बर। वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चौपाल बुधवार को आयोजित की गई। स्वदेशी गो नस्लों का अधिक उत्पादन के लिए प्रबंधन विषय पर विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने पशुपालको से वार्ता की। कुलपति प्रो. सतीश के. गर्ग ने चौपाल में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पशुपालकों को स्थानीय जलवायु के अनुरूप पशुओं की नस्लों का पालन करना चाहिए, जिससे कि पशुपालन व्यवसाय की लागत में कमी आती है एवं पशुपालक को अधिक मुनाफा मिलता हैं। वर्तमान में लोगो में स्वास्थय के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ स्वच्छ एवं गुणवत्ता युक्त पशु उत्पादों की मांग भी बढ़ी है। अतः पशुपालक स्थानीय जलवायु के अनुरूप देशी गोवंशों को पालकर अधिक फायदा उठा सकते हैं। कुलपति प्रो. गर्ग ने पशुपालकों से आमंत्रित विशेषज्ञ से संवाद का अधिक से अधिक लाभ उठाने की बात कही। निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने विषय प्रवर्तन करते हुए बताया कि गोपालन हमेशा से ही हमारी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक उन्नति का आधार रहा है। राजस्थान देश में 13.94 मिलियन गौवंश के साथ छठे स्थान पर है साथ ही कुल गौवंश का 83 प्रतिशत देशी एवं अवर्णित नस्ल राजस्थान में उपलब्ध है अतः राजस्थान देशी गोवंश के आधार पर समृद्ध प्रदेश है। इन देशी गौवंश का उचित प्रबंधन करके इनसे अधिक से अधिक लाभ पा सकते हैं। आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल, हरियाणा ने बताया कि राजस्थान में देशी व संकर दोनो प्रकार के गौवंश पाले जा रहे है। संकर नस्लों में होलिस्टन एवं जर्सी मुख्य नस्लें है जो कि अधिक दुग्ध उत्पादन केे लिए जानी जाती है। देशी नस्लों में गिर, साहीवाल, थारपारकर, कांकरेज, राठी, मालवी आदि मुख्य है जो कि भौगोलिक स्थिति के अनुरूप प्रदेश के अलग-अलग हिस्सो में पाली जा रही है। देशी एवं स्थानीय गोवंश में संकर गोवंश की तुलना में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक एवं प्रबंधन लागत कम रहती है यदि इन देशी गौवंश का उचित खाद्य, प्रजनन एवं स्वास्थ्य प्रबंधन किया जाए तो इनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। देशी गोंवश में ए-2 प्रोटीन वाला दुग्ध पाया जाता है जो कि मानव संसाधन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। पशुपालको को प्रजनन हेतु उन्नत सांडो का चुनाव करके उपयोग करना चाहिए। वर्तमान समय में देशी गौवंश उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। अतः डेयरी उद्योग नवयुवको के लिए रोजगार का आधार बन गया है।