राजुवास ई-पशुपालक चौपाल का आयोजन पशुजन्य ब्रुसेलासिस रोग से बचाव ही कारगर उपाय

बीकानेर, 14 जुलाई। वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा राज्यस्तरीय ई-पशुपालक चौपाल बुधवार को आयोजित की गई। पशुजन्य रोग ब्रुसेलोसिस विषय पर विशेषज्ञ प्रो. प्रदीप कुमार कपूर ने पशुपालकों से संवाद किया। कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने चौपाल में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज की वार्ता का विषय बड़ा ही सामायिक है। आज पूरा विश्व नित नई बीमारियों का सामना कर रहा है इनमें से ज्यादातर रोग पशु जनित है अतः हमें विभिन्न पशु उत्पाद जैसे दूध, अण्डा, मास इत्यादि का सुरक्षित खाद्य तन्त्र बनाना होगा एवं वातावरण में उपस्थित हानिकारक कारकों का पता लगाकर नियंत्रण करना होगा ताकि मनुष्य, पशु एवं वातावरण का सुरक्षित तंत्र तैयार हो सके। आयोजन सचिव एवं निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने विषय प्रवर्तक करते हुए बताया कि मनुष्य में फैलने वाले 70 से 75 प्रतिशत संक्रामक रोग पशुजनित है। इन रोगो पर नियंत्रण करके हम पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचा सकते है। आंमत्रित विशेषज्ञ प्रो. प्रदीप कुमार कपूर, प्रिंसिपल खालसा पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, अमृतसर ने विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि ब्रुसेलोसिस रोग गाय, भैंस, भेंड, बकरियों व सूकर में मिलता है। इस रोग से ग्रसित पशुओं में गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में गर्भपात हो जाता है। पशुओं में पूरी तरह जर नहीं गिरती है। ग्रसित पशु के मल, मूत्र, दूध, जर एवं योनि आदि में स्त्राव से संक्रमण दूसरे पशुओं एवं मनुष्यों में फैलता है। सक्रंमित मनुष्य में रूक-रूक कर बुखार आना एवं जननांगो में सूजन प्रमुख लक्षणों में से एक है। पशुओं में इस रोग से बचाव हेतु 4 से 8 महीनों की मादा बछिया का टीकाकरण करवाना चाहिए। पशु बाड़े एवं पशुओं की नियमित सफाई रखनी चाहिए। पशुशाला में पशुओं की नियमित जांच करवानी चाहिए एवं रोगी पशुओं को अलग रखना चाहिए। पशु उत्पादों का सेवन पूरी तरह उबालकर एवं पका कर करना चाहिए। इस रोग से बचाव ही प्रमुख उपाय है। ई-पशुपालक चौपाल में राज्यभर के पशुपालक, किसान विश्वविद्यालय के अधिकारिक फेसबुक पेज से जुडे़।