वेटरनरी विश्वविध्यालय में चीनी व्यापार की चुनौती पर संगोष्ठी : राष्ट्र सुरक्षा की चुनौती से निपटने के लिए कारगर उपायों के साथ जनता जागरूक होना जरूरी: चन्द्रशेखर

क्रमांक 1717                                                                                                                  30 अगस्त, 2017

वेटरनरी विश्वविध्यालय में चीनी व्यापार की चुनौती पर संगोष्ठी
राष्ट्र सुरक्षा की चुनौती से निपटने के लिए कारगर उपायों के साथ जनता जागरूक होना जरूरी: चन्द्रशेखर

बीकानेर, 30 अगस्त। भारत की सुरक्षा के लिए चीन की विस्तारवादी और आर्थिक साम्राज्यवादी नीतियों को पस्त करने के लिए देष के आम-अवाम को चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करके स्वदेषी व्यापार को मजबूत बनाना होगा। ये विचार वेटरनरी विष्वविद्यालय के ओडिटोरियम में ‘‘चीनी व्यापार-राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती‘‘ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में जोधपुर के प्रांत प्रचारक श्री चंद्रषेखर ने बुधवार को व्यक्त किए। मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में प्रांत प्रचारक ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चीन पाकिस्तान से भी अधिक खतरा बना हुआ है। सरकार की रीति-नीति से डोकलाम विवाद में भारत नेे कूटनीतिक सफलता हासिल की है। चीन ने भारत को चारों ओर से घेरने की नीति अपनाई है। पड़ौसी मुल्कों में आर्थिक विनियोजन, चीन-पाकिस्तान द्वारा ग्वादर तक आर्थिक गलियारा जैसे निर्णय हमारी सुरक्षा को चुनौती है। देष में सस्ती चीजों का निर्यात करके चीन यहां के बाजार में घुसपैठ कर रहा है। हमें इसके मंतव्य को समझते हुए कारगर कदम उठाने की जरूरत है। हमारा चीन के साथ 71.5 अरब डाॅलर का आयात-निर्यात है। हमारे यहां से 9 बिलियन डाॅलर का ही निर्यात है। देष के व्यापारिक घाटे में 25 प्रतिषत कच्चे तेल का आयात कम किए जाने पर 65 से 70 प्रतिषत व्यापारिक घाटा चीन से भारत को हो रहा है। चीन द्वारा देष में सस्ते माल के जरिए खतरनाक किस्म के खिलौने, मिलावटी दूध के उत्पाद और वस्तुएं आमजन के लिए खतरनाक सिद्ध हो रही है, क्योंकि इनका निर्यात चीन द्वारा ‘‘यूज एण्ड थ्रो‘‘ पदार्थों द्वारा किया जा रहा है। श्री चंद्रषेखर ने कहा कि चीन की घिनौनी हरकतें देषवासियों के समझ आ गई है। जिसके परिणास्वरूप चीनी वस्तुओं का बहिष्कार किया जा रहा है। देष की व्यापारिक नीतियों में बदलाव के साथ तकनीकी में सुधार, सस्ती वस्तुओं का निर्यात, बुद्धिजीवियों का प्रबोधन और शोध कार्यों में तेजी लानी होगी। देष में स्वदेषी जागरण मंच जैसे गैर राजनीतिक संगठन इस ओर कार्य में जुटे हुए हैं। स्वदेष से प्यार और देषभक्ति के जज्बे से ही हम हर चुनौती से निपट सकते हैं। चीनी वस्तुओं का बहिष्कार, जरूरत पड़ने पर अन्य देषों के सामान का ही उपयोग और घरेलू उत्पादों की ही वरीयता हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। वेटरनरी विष्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने कहा कि आज की महती संगोष्ठी का उद्देष्य लोगों को जागरूक कर राष्ट्र को समृद्धि की ओर ले जाना है। प्रारंभ में वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने पषुचिकित्सा षिक्षा और पषुपालन के साथ ही राष्ट्रीय सरोकारों से जुड़े रहने के लिए चिंतन गोष्ठी को महत्वपूर्ण बताया। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एस.सी. गोस्वामी ने सभी का आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अषोक गौड़ ने किया। संगोष्ठी में कुलसचिव बी.आर. मीणा, डीन, डायरेक्टर, फैकल्टी सदस्यगण, कर्मचारी-अधिकारी और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में षिकरत की।

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