वेटरनरी विश्वविद्यालय राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चैपाल मुर्गीपालन एक लाभकारी व्यवसाय पर विशेषज्ञ वार्ता

वेटरनरी विश्वविद्यालय
राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चैपाल
मुर्गीपालन एक लाभकारी व्यवसाय पर विशेषज्ञ वार्ता

बीकानेर, 25 नवम्बर। वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा बुधवार को “मुर्गी पालन एक लाभकारी व्यवसाय“ विषय पर राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चैपाल का आयोजन किया गया। पशुपालक चैपाल को सम्बोधित करते हुए वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि राजस्थान में मुर्गियों की संख्या में पिछली पशु गणना की तुलना में 80 प्रतिशत वृद्धि हुई है। यह ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में मुर्गीपालन के प्रति सकारात्मक रूझान एवं मुर्गी एवं इसके उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग को दर्शाता है। देशी मुर्गियों के अण्डे एवं मास की मांग बहुत बढ़ी है जबकि इसकी आपूर्ति कम है। आज कोविड-19 के समय में पशुपालक एवं ग्रामीण युवा इस व्यवसाय को रोजगार हेतु शुरू कर सकते हैं। मुर्गीपालन व्यवसाय के दृष्टिकोण से बहुत अच्छा व्यवसाय है। अतः पशुपालकों भाईयों को इस चर्चा का पूरा लाभ उठाना चाहिए। ई-पशुपालक चैपाल में विशेषज्ञ रूप में आंमत्रित वेटरनरी काॅलेज, मथुरा के अधिष्ठाता प्रो. पी.के. शुक्ला ने परिचर्चा के दौरान बताया कि देश की आजादी के बाद पशुपालन ही ऐसा क्षेत्र है जिसने उत्तरोतर वृद्धि की है। राजस्थान की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पशुपालन हमेशा महत्वपूर्ण व्यवसाय रहा है। देश में कुपोषण की समस्या के निवारण हेतु मुर्गी पालन एक मुख्य एवं लाभकारी व्यवसाय है। राजस्थान की ऊसर भूमि मुर्गीपालन के लिए उपयोगी है। विगत चार दशकों से मुर्गीपालन क्षेत्र में लगातार वृद्धि हुई है। आज मुर्गीपालन व्यवसायिक स्तर पर पहुँच चुका है। इस वर्ष मुर्गीपालन व्यवसाय 1 लाख 20 हजार करोड़ रूपये का रहा है। मुर्गीपालन हेतु सारी सुविधाएं देश में ही उपलब्ध है। अतः पशुपालक भाई मुर्गीपालन हेतु प्रारम्भिक जानकारी एवं व्यवहारिक कौशलता अर्जित करके इस व्यवसाय को शुरू कर सकते है। मुर्गीयों की देशी नस्लों में कड़कनाथ, प्रतापधन, असील, केरीप्रिया लेयर, केरीब्रो विशाल, केरीब्रो धनराज, जारसीम आदि प्रमुख है जिनकी उत्पादकता के अच्छे परिणाम पशुपालकों को मिले है। अच्छी नस्ल चुनाव, उचित टीकाकरण, संतुलित भोजन, उपयुक्त बिछावन व्यवस्था का ध्यान रखकर पशुपालक इस व्यवसाय से अधिक मुनाफा कमा सकते है। डाॅ. शुक्ला ने चर्चा के दौरान पशुपालको के सवालो का जवाब देते हुए उनकी शकांओं का समाधान भी किया। प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने चैपाल का संचालन किया प्रो. धूड़िया ने बताया कि प्रत्येक माह के दूसरे और चैथे बुधवार को श्रृंखलाबद्ध ई-पशुपालक चैपाल से राज्यभर के किसान और पशुपालक लाभान्वित हो रहे है। राजुवास के अधिकारिक फेसबुक पेज पर इसका सीधा प्रसारण देखा और सुना गया।

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