वेटरनरी विश्वविद्यालय में चतुर्थ दीक्षान्त समारोह का आयोजन 756 उपाधियों और 27 स्वर्ण पदकों से किया विद्यार्थियों को अलंकृत राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने की आनलाइन शिरकत

वेटरनरी विश्वविद्यालय में चतुर्थ दीक्षान्त समारोह का आयोजन
756 उपाधियों और 27 स्वर्ण पदकों से किया विद्यार्थियों को अलंकृत
राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने की आनलाइन शिरकत

बीकानेर, 25 फरवरी। वेटरनरी विश्वविद्यालय के चतुर्थ वर्चुअल दीक्षांत समारोह में गुरूवार को पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान के 756 छात्र-छात्राओं को उपाधियों और 25 को स्वर्ण पदक तथा 2 कुलाधिपति स्वर्ण पदक से आनलाइन अलंकृत किया गया। दीक्षांत समारोह में वर्ष 2018-19 व 2019-20 सत्र के लिए स्नातक योग्यता प्राप्त कर लेने वाले 557 छात्र-छात्राओं को उपाधियां, स्नातकोत्तर स्तर के 158 को उपाधियां तथा 41 को विद्यावाचस्पति उपाधियां प्रदान की गई। 25 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से और स्नातकोत्तर शिक्षा में सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर अभिलाषा दाधीच व प्रवीण कुमार पुरोहित को कुलाधिपति स्वर्ण पदक से अलंकृत किया गया।
माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने समारोह के प्रारंभ में संविधान की प्रस्तावना और मूल कर्तव्यों का वाचन किया जिसे सभी प्रतिभागियों ने मन में दोहराया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत का अर्थ नई शुरूआत है। शिक्षा का उपयोग अपने लिए नहीं वरन् समाज के लिए करना है। पाठ्य सामग्री को जीवन व्यवहार के रूप में लिया जाना चाहिए। दीक्षांत समारोह विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि यह विद्यार्थियों की मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम तथा शिक्षकों व कर्मचारियों के सच होते सपनों का उत्सव है। विश्वविद्यालय का ध्येय वाक्य “पशुधनं नित्यम् सर्वलोकोपारकम्“ अर्थात पशुधन सदैव सभी लोगों के लिए हितकारी है। कुलाधिपति ने महात्मा गांधी और चिंतक छगन मोहता के उद्हरण देकर पर्यावरण की दृष्टि में पशुओं के प्रति संवेदना का जिक्र करते कहा कि पशुओं का दोहन नहीं पोषण भी होना चाहिए, अतः प्रकृति और पशुधन में संतुलन बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा राजस्थान पशुचिकित्सा में प्राचीन काल से अग्रणी रहा है और इस विश्वविद्यालय का भी पुराना इतिहास है। पशुचिकित्सा शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में प्रदेश के विकास में इस विश्वविद्यालय की परोक्ष रूप में अहम् भूमिका रही है। कृषि और पशुपालन के सामंजस्य से किसानों की आय को तिगुना करने की संभावनाएं हैं अतः पशुपालन पर ध्यान देने की जरूरत है। राजस्थान में पशुपालन क्षेत्र का राज्य जी.डी.पी. में लगभग 11 प्रतिशत का योगदान है। राजस्थान प्रदेश पशुधन सम्पदा में भी बहुत संपन्न है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई की पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा जिलों में स्थापित पशु विज्ञान केन्द्रों के मार्फत गांव-ढ़ाणी तक बैठे किसान और पशुपालकों को नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकें तीव्र गति से प्रसारित की जा रही हैं। इससे स्थानीय समस्याओं पर अनुसंधान एवं उनका समाधान भी जिले में ही संभव हो पा रहा है। इन केन्द्रों द्वारा उन्नत पशुपालन के प्रशिक्षण कार्यों, रोग निदान सेवाओं और चारे-दाने की जांच के कार्यों से पशुपालकों को बड़ी राहत मिल रही है। देशी गौवंश दूध एवं दुग्ध उत्पाद, जैविक पशु उत्पाद व प्रमाणीकरण, अनुसंधानों का पेटेन्टीकरण कार्यों से विश्वविद्यालय वैश्विक स्पर्द्वा के लिए तैयार हो रहा है। इस ओर सतत् कार्य करने की जरूरत है। मुझे यह जानकर खुशी है कि विश्वविद्यालय में छः देशी गौवंश का संरक्षण और संवर्द्धन का कार्य आठ पशुधन अनुसंधान केन्द्रों पर किया जा रहा है। भू्रण प्रत्यारोपण तकनीक से उच्च उत्पादन वाली संतति प्राप्त करके दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और अच्छी नस्ल विकसित किये जाने की सराहना करता हूँ। राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय देश व प्रदेश में तेजी से आगे बढ़ता हुआ विश्वविद्यालय बना है। आधुनिक पशुचिकित्सा, पशुपालकों के हित में नई तकनीकों का विकास, पशुपालन संसाधनों के सुद्दढ़ीकरण और पशुपालकों के शिक्षण-प्रशिक्षण में एक अग्रणी संस्थान के रूप में इस विश्वविद्यालय को तैयार किया गया है।
दीक्षांत समारोह के विशिष्ट अतिथि कृषि एवं पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि राज्य के एकमात्र राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के देश के श्रेष्ठतम पशुचिकित्सा शिक्षा संस्थानों में शामिल होने का हमें गर्व है। पशुधन राजस्थान की सुख-समृद्धि से जुड़ा किसानों की जीवन रेखा है। पशुपालक, किसान तथा समाज के कमजोर वर्ग के परिवारों को रोजगार के साधन सुलभ करवाकर आर्थिक दृृष्टि से आत्मनिर्भर बनाए जाने के प्रयास किए जा रहे है। पशुपालन मंत्री ने कहा कि राजस्थान प्रदेश पशु संख्या व पशु उत्पादन में देश में सर्वोपरि है और यह हमारे पशुपालक भाईयों की मेहनत का नतीजा है। वेटरनरी विष्वविद्यालय द्वारा मनुष्य के समकक्ष पशुचिकित्सा रोग निदान और अत्याधुनिक उपचार सुविधाओं की सराहना की और कहा कि पूरे देश में पशुचिकित्सा में आधुनिकतम तकनीक और उपकरणों से उपचार सेवाएं देने वाला राजस्थान अनूठा प्रदेश बन गया है। पशुपालन मंत्री कटारिया ने कहा कि विश्वविद्यालय के पशु विज्ञान केन्द्रों द्वारा वैज्ञानिक प्रशिक्षण, सलाहकारी सेवाएं व रोग निदान सेवा प्रदान करना सराहनीय है तथा राज्य के गांव-ढा़णी तक बैठे पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन की तकनीक पहुँचाने के लिए इन पशु विज्ञान केन्द्रों को अन्य जिलों में प्रारंभ किये जाने की आवश्यकता है।
दीक्षांत भाषण देते हुए महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् एवं सचिव, कृषि अनुसंधान व शिक्षा विभाग, नई दिल्ली डाॅ. त्रिलोचन महापात्र ने कहा कि राजस्थान पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय ने अभूतपूर्व प्रगति की है। इसके लिए मैं सभी शिक्षकों-वैज्ञानिकों व कुलपति को बधाई देता हूँ। विश्वविद्यालय के शिक्षण, अनुसंधान व प्रसार के समन्वित कार्य समय पर किसानों और पशुपालकों तक पहुँचे इसके प्रयास किये जाने चाहिए। राजस्थान दुग्ध उत्पादन, ऊन उत्पादन व मास उत्पादन की अग्रणी भूमिका में है। कोविड-19 महामारी के बावजूद भी पशुपालन के क्षेत्र में राजस्थान ने प्रगति की है। वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा देशी गौवंश के श्रेष्ठ नस्लों का संवर्द्धन व बकरी विकास के कार्य प्रंशसनीय है। राज्य में उत्पादन व उत्पाकता के लिए तापमान में वृद्धि, जलवायु परिवर्तन और कम पानी की चुनौतियां है। अतः राज्य में समेकित खेती की पद्धति को अपनाया जाना जरूरी है। कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन जैसे कार्यों को भी शामिल किया जाना जरूरी है। उन्होंने विश्वविद्यालय में उद्यमिता विकास के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की परियोजनाओं पर अच्छा कार्य हो रहा है।
दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने विश्वविद्यालय का प्रगति विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के सहयोग से उत्तरोत्तर प्रगति कर पशुचिकित्सा षिक्षा में नए आयाम स्थापित किए हैं। वेटरनरी विश्वविद्यालय राज्य में एक मात्र पशुचिकित्सा एवं शिक्षा का संस्थान है जो पशुचिकित्सा षिक्षा, अनुसंधान और प्रसार षिक्षा के क्षेत्र में विषेषज्ञ और विषिष्ट सेवाएं प्रदान कर रहा है। कुलपति ने कहा कि हमारा प्रयास है कि विकास की गति को बनाए रखकर आमजन की अपेक्षाओं के अनुरूप पशुचिकित्सा क्षेत्र के सुद्दढ़ीकरण में अपना योगदान देते रहें। राजुवास को देश और दुनिया में एक उत्कृष्ट संस्थान के रूप में स्थापित करना हमारा संकल्प है।
माननीय राज्यपाल, राजस्थान एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने वेटरनरी विश्वविद्यालय के नवनिर्मित तीन मंजिला परीक्षा भवन का वर्चुअल लोकापर्ण और वेटरनरी विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क प्रकोष्ठ द्वारा प्रकाशित “एक्ट एण्ड स्टेट्यूटस“ हैंड बुक का विमोचन किया।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलसचिव अजीत सिंह राजावत, संकायाध्यक्ष प्रो. आर.के. सिंह, प्रबंध मंडल सदस्य अशोक मोदी, पूर्व कुलपति डाॅ. ए.के. गहलोत, विश्वविद्यालय के डीन, डायरेक्टर, अधिकारी, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और अतिथि उपस्थित थे। इस के पहले दीक्षांत समारोह को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सीधा प्रसाारित किया गया जिसे देश-विदेश में बैठे लोगों ने भी देखा। समारोह स्थल पर भी एल.ई.डी. स्क्रीन पर भी दीक्षांत समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। वर्चुअल दीक्षांत समारोह का संचालन प्रो. राजेश कुमार धूड़िया निदेशक प्रसार शिक्षा, एवं डाॅ. अशोक डांगी, प्रभारी आईयूएमएस के द्वारा किया गया।

25 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक व 2 को कुलाधिपति स्वर्ण पदक

स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में स्नातक स्तर में इनूपाला श्रीनव्या, विशाल यादव,स्नातकोत्तर में दिनेश कुमार सुन्वासिया, भूपेन्द्र कस्वाँ, बुद्धि प्रकाश मीना, रेखा पंवार, प्रकाश चन्द्र सांवल, बसंत, अभिलाषा दाधीच, नरेश कुमार, अशोक प्रजापत, सूर्य प्रकाश , ओम प्रकाश , जोरावर सिंह, अरूणा पंवार, नरेन्द्र सिंह, शिवांगी पाण्डेय, वीनू सिंघल, विक्रम पूनियाँ, प्रवीण कुमार पुरोहित, अभिषेक केन और प्रियंका कुमारी शामिल है। विद्या-वाचस्पति में पदमा मील, मंगेश कुमार और तारा चन्द नायक ने शामिल रहे। अभिलाषा दाधीच और प्रवीण कुमार पुरोहित को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किये गये।