वेटरनरी विश्वविद्यालय में ई-पशुपालक चौपाल

वेटरनरी विश्वविद्यालय में ई-पशुपालक चौपाल

बीकानेर, 14 अक्टूबर। वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा बुधवार को पशुओं में मुंहपका-खुरपका रोग पर राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चौपाल का आयोजन किया गया। इस संक्रामक पशु रोग के कारण प्रतिवर्ष देश में 30 हजार करोड़ रूपए की हानि होती है। भारत में वर्ष 2030 तक इसके उन्मूलन का लक्ष्य है। पशुपालक चौपाल को सम्बोधित करते हुए वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ई-चौपाल डिजिटिल मोड पर संचार और संपर्क का एक सशक्त माध्यम है। इससे वेटरनरी के पशुचिकित्सा विशेषज्ञ और पशुपालन विभाग मिलकर पशुओं के स्वास्थ्य और पशुपालकों के कल्याण कार्यक्रमों को गांव-ढाणी तक पहुंचा रहे हैं। आमंत्रित विशेषज्ञ पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. भवानी सिंह राठौड़ ने कहा कि मुंहपका-खुरपका रोग विषाणु जनित है जिससे पशु की उत्पादन क्षमता में कमी के कारण पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान होता है। इसका बचाव समय पर एफ.एम.डी. टीका लगाकर ही किया जा सकता है। पशुपालन विभाग द्वारा राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत निःशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। पूरे राज्य में 12 अक्टूबर से टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। पशुपालन विभाग के ही अतिरिक्त निदेशक (मोनिटरिंग) डॉ. आनंद सेजरा ने चौपाल के किसान पशुपालकों को राज्य की पशु कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। जिलों में रोग निदान प्रयोगशालाएं, कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र, बांझपन निवारण शिविर और बधियाकरण शिविरों में पशुचिकित्सा विशेषज्ञ सेवाएं मुहैय्या करवाई जाती है। राजुवास के प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. आर.के. धूडिया ने चौपाल का संचालन किया। प्रो. धूड़िया ने बताया कि प्रत्येक माह के दूसरे और चौथे बुधवार को श्रृंखलाबद्ध ई-पशुपालक चौपाल से राज्यभर के किसान और पशुपालक लाभान्वित हो रहे हैं। राजुवास के अधिकारिक फेसबुक पेज से इसका सीधा प्रसारण देखा व सुना जा सकता है।