वेटरनरी विश्वविद्यालय में जिले के कृत्रिम गर्भाधान के तकनीशियनों का रिफ्रेशर प्रशिक्षण सम्पन्न

क्रमांक 1843                                                                                                             11 जनवरी, 2018

वेटरनरी विश्वविद्यालय में जिले के कृत्रिम गर्भाधान के
तकनीशियनों का रिफ्रेशर प्रशिक्षण सम्पन्न
शहर में नंदी शाला की स्थापना के प्रयासः महापौर चैपड़ा

बीकानेर, 11 जनवरी। पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान पर जिले के तकनीशियनों का दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण गुरूवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय के पशु मादा एवं प्रसूति रोग विभाग में संपन्न हो गया। प्रशिक्षण के समापन समारोह के मुख्य अतिथि महापौर श्री नारायण चैपड़ा ने तकनीशियनों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर श्री चैपड़ा ने कहा कि अनुत्पादक गोवंश को खुला छोड़ने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना चाहिए क्योंकि हमारी संस्कृति में गाय को मां का दर्जा हासिल है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी है कि वे स्वदेशी गोवंश से अधिक उत्पादन के साथ ही अच्छी नस्ल की बछड़ियां और उन्नत सांड पैदा करने की तकनीक विकसित करें। उन्होंने बताया कि शहर में निराश्रित पशुओं की बढ़ती संख्या चिंताजनक है। इसके लिए बीकानेर में नंदीशाला की स्थापना के प्रयास हो रहे हैं। निराश्रित पशुओं को पकड़ने के संसाधनों का भी विकास जरूरी है। प्रशिक्षण के संयोजक और वेटरनरी विश्वविद्यालय के क्लिनिक्स निदेशक प्रो. जे.एस. मेहता ने बताया कि देशी गोवंश के बांझपन निवारण और उन्नत नस्ल के संवर्द्धन के लिए राजुवास द्वारा शिविरों का आयोजन किया जाता है। राजुवास में उरमूल ट्रस्ट के सहयोग से गायों में कृत्रिम गर्भाधान के लिए तकनीकी प्रशिक्षण बैचेज में प्रदान किया जा रहा है। जिले के दूरदराज में कार्य करने वाले 10 तकनीशियनों को इस प्रशिक्षण में शामिल किया गया है। उरमूल ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अरविन्द ओझा ने बताया कि जिले के 50 तकनीशियनों को कृत्रिम गर्भाधान के प्रशिक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उरमूल ट्रस्ट के प्रमुख वैज्ञानिक डाॅ. एम.एस. राठौड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राजुवास मेडिसिन विभाग के प्रो. डी.के. बिहानी, सर्जरी विभाग के डाॅ. प्रवीण बिश्नोई, फैकल्टी क्लब के अध्यक्ष प्रो. राधेश्याम आर्य सहित फैकल्टी सदस्य मौजूद थे।

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