वेटरनरी विश्वविद्यालय में संभाग के 55 डेयरी प्रबंधकों का तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू गोपालन हमारे जीवन की धुरीः अधिष्ठाता प्रो. शर्मा

क्रमांक 1816                                           20 दिसम्बर, 2017

वेटरनरी विश्वविद्यालय में संभाग के 55 डेयरी प्रबंधकों
का तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू
गोपालन हमारे जीवन की धुरीः अधिष्ठाता प्रो. शर्मा

बीकानेर, 20 दिसम्बर। संभाग के डेयरी प्रबंधकों/संचालकों का तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण वेटरनरी विश्वविद्यालय में बुधवार से शुरू हो गया। राज्य के गोपालन विभाग और राजुवास के प्रसार शिक्षा निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण में संभाग के 55 डेयरी प्रबंधक/संचालक भाग ले रहे हैं। राजुवास के पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग के सभागार में उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि गाय हमारे जीवन की धुरी है क्यों कि इससे मिलने वाले दूध और अन्य उत्पाद हमारे परिवारों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। स्वदेशी गौ वंश में उत्पादन की अद्भुत क्षमता विद्यमान है। गिर वंश की गाय से ब्राजील में 62 किलोग्राम दूध प्रतिदिन प्राप्त किया गया है। हम अपने गौ वंश के नस्ल और प्रजनन सुधार के साथ ही संतुलित पोषण से इनकी क्षमताओं का पूरा उपयोग कर पायेंगे। अतः यह वैज्ञानिक प्रशिक्षण नया सीखने और करने का अवसर है। गोपालन विभाग, जयपुर के संयुक्त निदेशक डाॅ. जे.पी. अटल ने कहा कि विभाग गायों के संरक्षण, संवर्द्धन, पंचगव्य के स्त्रोतों की लोकप्रियता, मूल्य संवर्द्धन और गोशालाओं के सुद्दढीकरण के लिए कार्य कर रहा है। गो पालन और पोषण के लिए वैज्ञानिक उपायों को लागू करने के लिए पशुपालकों को प्रेरित करने के लिए प्रशिक्षण उपयोगी है। राजुवास के प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. ए.पी. सिंह ने कहा कि वेटरनरी विश्वविद्यालय पशुओं के संवर्द्धन और संरक्षण के लिए समय-समय पर वैज्ञानिक प्रशिक्षणों का आयोजन कर रहा है। राज्य के 12 जिलों में वेटरनरी विश्वविद्यालय प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्रों के मार्फत भी व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पशुपालक राजुवास की प्रसार शिक्षा योजनाओं से जुड़कर डेयरी उत्पादन बढ़ाने में कामयाब हो सकते हैं। विशिष्ट अतिथि राजुवास के अनुसंधान निदेशक प्रो. आर.के. सिंह ने बताया कि पशुधन अनुसंधान केन्द्रों में पशुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाये जाने के उपायों पर अनुसंधान कार्य पशुपालकों के हित में निरंतर किया जा रहा है। समारोह में कुलसचिव प्रो. हेमन्त दाधीच, क्लिनिक्स निदेशक प्रो. जे.एस. मेहता, पी.एम.ई. निदेशक प्रो. राकेश राव, प्रशासनिक सचिव प्रो. बी.एन. श्रृंगी मौजूद थे। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एस.सी. गोस्वामी ने सभी का आभार व्यक्त किया और डाॅ. विजय बिश्नोई ने कार्यक्रम का संचालन किया।
तकनीकी सत्र में तीन व्याख्यान हुए
बुधवार को प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. जी.एन. पुरोहित ने पशु प्रजनन कार्यक्रम व पशुओं में बांझपन के कारण और निवारण विषय पर व्याख्यान दिया। डाॅ. जे.पी. कच्छावा ने पशु प्रबंधन, रोगों का उपचार और अधिकतम उत्पादन के उपायों के बारे में जानकारी दी। डाॅ. आर.एन. कच्छवाहा ने डेयरी फार्म प्रबंधन, एवं संरचना और उपकरण देखभाल के तौर-तरीकों की जानकारी दी।

निदेशक