वेटरनरी विश्वविद्यालय में पशुपालक तकनीकों व जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण पर राज्य के पशुपालकों का प्रशिक्षण शुरू जैविक उत्पादों का उपयोग समय की जरूरतः संसदीय सचिव डाॅ. मेघवाल

क्रमांक 1791                                                                                      5 दिसम्बर, 2017

वेटरनरी विश्वविद्यालय में पशुपालक तकनीकों व जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण पर राज्य के पशुपालकों का प्रशिक्षण शुरू
जैविक उत्पादों का उपयोग समय की जरूरतः संसदीय सचिव डाॅ. मेघवाल

बीकानेर, 5 दिसम्बर। वेटरनरी विश्वविद्यालय में राज्य के 10 जिलों से आए कृषक-पशुपालकों का दैनिक पशुपालन तकनीकों, जैविक पशु उत्पादों का प्रमाणीकरण और उनके महत्व पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मंगलवार से शुरू हो गया। प्रशिक्षण वेटरनरी विश्वविद्यालय और कट्स संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाता जा रहा है शिविर के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के संसदीय सचिव डाॅ. विश्वनाथ मेघवाल ने कहा कि जैविक कृषि और पशु उत्पाद व उपयोग हमारे स्वास्थ्य और निरोगी काया के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि पुरखों ने हमेशा जैविक उत्पादों का उपयोग किया और वे लम्बी आयु प्राप्त करते थे। वर्तमान में खान-पान के तौर -तरीकों में बदलाव से मानव जीवन में विभिन्न बीमारियों का प्रकोप बढ़ा है। उन्होंने कृषक व पशुपालकों का आह्वान किया कि वे जैविक उत्पादों की वैज्ञानिक जानकारी के साथ कार्य करेंगे। इससे उनकी आय में भी कई गुणा बढोतरी होगी। सत्र की अध्यक्षता करते हुए वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि जैविक पशु उत्पादों की तकनीकों और इनके उत्पादों का प्रमाणीकरण का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आपकी आय और जन स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। वेटरनरी विश्वविद्यालय में स्थापित विभाग जैविक पशुपालन तकनीकों के विकास और प्रशिक्षण का लाभ राज्य के कृषक व पशुपालकों तक पहुँचाने के लिए संकल्पबद्ध है। समारोह में विशिष्ट अतिथि राजुवास के वित्त नियंत्रक श्री अरविन्द बिश्नोई, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एस.सी. गोस्वामी और कुलसचिव प्रो. हेमन्त दाधीच ने भी संबोधित किया। राजुवास के जैविक पशुधन उत्पाद तकनीक केन्द्र के प्रमुख अन्वेषक डाॅ. विजय बिश्नोई ने बताया कि प्रशिक्षण में राज्य के जोधपुर, जयपुर, झालावाड़, कोटा, चित्तैड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, दौसा, सवाईमाधोपुर व उदयपुर जिलों से 104 किसान पशुपालक शामिल हैं जिसमें 20 महिलाएं हंै। कट्स इंटरनेशनल के सहायक निदेशक दीपक सक्सेना ने जैविक परियेाजना की जानकारी दी। वनशर्ट एशिया के संदीप भार्गव ने पशुपालन के जैविक प्रमाणीकरण के बारे में बताया। केन्द्र की प्रमुख प्रो. बसन्त बैस ने सभी का आभार जताया। इस अवसर पर अतिथियों ने जैविक पशुपालन पर प्रकाशित एक पुस्तिका का विमोचन किया। उद्घाटन सत्र में प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. ए.पी. सिंह, अनुसंधान निदेशक प्रो. आर.के. सिंह और क्लिनिक्स निदेशक प्रो. जे.एस. मेहता सहित फैकल्टी सदस्य भी मौजूद थे।

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