वेटरनरी विश्वविद्यालय में देशी गौवंश दुग्ध उत्पादक पार्लर शुरू किये जायेंगेः कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा, दशाब्दी वर्ष में पशु कल्याण के कई नवाचार प्रारंभ

क्रमांक 329                                                                                                                             21 नवम्बर, 2019

वेटरनरी विश्वविद्यालय में देशी गौवंश दुग्ध उत्पादक
पार्लर शुरू किये जायेंगेः कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा
दशाब्दी वर्ष में पशु कल्याण के कई नवाचार प्रारंभ

बीकानेर, 21 नवम्बर। वेटरनरी विश्वविद्यालय राज्य के तीनों महाविद्यालय परिसरों में देशी गौवंश दूध उत्पादक पार्लर शुरू करके लोगों को गुणवŸाा वाले उत्पाद मुहैय्या करवाएगा। 13 जिलों में पषुचिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्रों के वैज्ञानिक राज्य में पशुपालकों के लिए “पैकेज आॅफ प्रेक्टिस“ लागू करके पशुचिकित्सा और पशुपालन के सुद्दढीकरण कार्य में जुटेगा। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने गुरूवार को विश्वविद्यालय के डीन-डाॅयरेक्टर के साथ मंथन बैठक में इस आशय के निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि माननीय राज्यपाल और कुलाधिपति द्वारा राज्य के कुलपति समन्वय समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों की अनुपालना में वेटरनरी विष्वविद्यालय द्वारा सामाजिक सरोकार और कौशल विकास के उपयोगी कार्यक्रम पूरी शिद्दत के साथ लागू किए जा रहे हैं। पशुपालन के क्षेत्र में नवाचार, गुणवŸाा पूर्व शिक्षण और प्रशिक्षण द्वारा लोगों में चेतना लाई जाएगी। कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय में उपलब्ध संवेदनशील उन्नत तकनीक के उपकरणों और प्रयोगशालाओं का दायरा बढ़ाकर उपयोगिता को प्रभावी स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय राज्य के पैरावेट कर्मचारियों और अध्यनरत विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए लघु पाठ्यक्रम शुरू करेगा। गौशाला तकनीकी सुद्दढ़ीकरण के तहत विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों, अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्रों द्वारा एक-एक गौशालाओं को गोद लेकर उनके चहुँमुखी विकास के लिए तकनीकी परामर्श सेवाएं सुलभ करवायी जाएगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के सभी संस्थानों और केन्द्रों को “ग्रीन, क्लीन और प्लास्टिक मुक्त“ परिसर में विकसित करने का निर्णय लिया गया। सभी संस्था प्रधानों को सौर ऊर्जा और वर्षा जल संरक्षण कार्यों की उपयोगिता को प्राथमिकता देने की हिदायत दी गई। पषुधन अनुसंधान केन्द्रों को पषु आहार निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने, अनुसंधान के पैटेन्ट और जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण करवाने के लिए निर्देशित किया गया। बैठक में राजुवास के विŸा नियंत्रक अरविंद बिश्नोई, सहित विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेशक एवं अधिकारी मौजूद थे।

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