वेटरनरी विश्वविद्यालय में 21 दिवसीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण भैंस का दूध 100 फीसदी ए-2 श्रेणी का पौष्टिक और गुणी है: निदेशक डाॅ. इन्द्रजीत सिंह

क्रमांक 1767                                                                                                                     11 नवम्बर, 2017

वेटरनरी विश्वविद्यालय में 21 दिवसीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण
भैंस का दूध 100 फीसदी ए-2 श्रेणी का पौष्टिक
और गुणी है: निदेशक डाॅ. इन्द्रजीत सिंह

बीकानेर, 11 नवम्बर। भारत में भैंसों की जैव विविधता है और आजादी के बाद देश के कुल दूध उत्पादन में भैंसों के दूध का 50 से 57 प्रतिशत तक योगदान है। ये विचार केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान हिसार के निदेशक डाॅ. इंद्रजीत सिंह ने शनिवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय में देशी पशुओं की नस्लों के संरक्षण एवं संवर्द्धन पर वैज्ञानिकों के शीतकालीन प्रशिक्षण में व्यक्त किए। उन्होंने 21 दिवसीय प्रशिक्षण के 13 वें दिन वैज्ञानिकों को अपने उद्बोधन में कहा कि देश में कुल 11 करोड़ भैसें हैं जिनमें विश्व की श्रेष्ठ नस्लें मुर्रा, मिलिरावी, जाफरावादी और मेहसाना प्रमुख हैं। भैंस का दूध 100 फीसदी ए-2 श्रेणी का है और यह भारत में डेयरी उपयोग में रीढ़ की हड्डी है। इसमें वसा अधिक होने के बावजूद काॅलेस्ट्राॅल कम है तथा गुणी व पौष्टिक होता है। पशुपालकों में विदेशी व संकर नस्ल की गायों के बजाय भैंस पालन की ओर रूझान बढ़ रहा है। निदेशक ने वैज्ञानिकों के समक्ष अपने प्रजेन्टेशन में बताया कि संस्थान “जिनोमिक सलेक्शन” पर अन्र्तराष्ट्रीय भैंस अनुसंधान संगठन के साथ एक परियोजना पर कार्य कर रहा है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने भैंस की चार नस्लों के संतति परीक्षित (प्रोजेनी) वीर्य का उत्पादन किया है। उन्होंने भैेसों के उन्नयन के लिए प्रजनन तकनीकों की भी जानकारी दी। संस्थान भैंस पालकों के हित में बफैलोपीडिया, व्हाट्सएप, ई-भैंस ज्ञान केन्द्र और यू-ट्यूब जैसे सोशन मीडिया का भी उपयोग कर रहा है। राजुवास के छात्र कल्याण अधिष्ठाता और प्रशिक्षण के निदेशक प्रो. एस.सी.गोस्वामी ने निदेशक का आभार जताया। प्रो. गोस्वामी ने बताया कि इससे पूर्व शीतकालीन प्रशिक्षण में प्रो. एस.के. कश्यप ने पशु जैव प्रौद्योगिकी में उन्नत तकनीक विषय पर, प्रो. बसंत बैस ने देशी पशुधन के जर्मप्लात्म के प्रबंधन पर, प्रो. आर.के. धूडिया ने पशुपोषण तकनीक पर तथा डाॅ. देवीसिंह राजपूत और केन्द्रीय भेड़ ऊन उनुसंधान संस्थान के डाॅ. आशीष चैपड़ा ने भेड़ों की विभिन्न नस्लों के संरक्षण पर अपने व्यख्यान प्रस्तुत किए।

समन्वयक
जनसम्पर्क प्रकोष्ठ