वेटरनरी विश्वविद्यालय में 21 दिवसीय शीतकालीन कार्यशाला शुरू देशी पशुओं का संरक्षण और संवर्द्धन समय की जरूरत हैः कुलपति प्रो. छीपा

क्रमांक 1756                                                                                                                 30 अक्टूबर, 2017

वेटरनरी विश्वविद्यालय में 21 दिवसीय शीतकालीन कार्यशाला शुरू
देशी पशुओं का संरक्षण और संवर्द्धन समय की जरूरत हैः कुलपति प्रो. छीपा

बीकानेर, 30 अक्टूबर। देशी पशुओं की नस्लों के संरक्षण एवं संवर्द्धन पर वैज्ञानिको की 21 दिवसीय शीतकालीन कार्यशाला का वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने सोमवार को विधिवत् उद्घाटन किया। वेटरनरी विश्वविद्यालय के पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में 10 राज्यों के 25 वैज्ञानिक-विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रो. छीपा ने कहा कि देश में देशी पशुओं की नस्लों और उनके उत्पादों का प्राचीनकाल से विशेष महत्व रहा है। देशी नस्लें वातावरण के अनुकूल और अधिक लाभकारी सिद्ध हुई हैं। देशी पशुधन के उत्पाद अधिक गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक हंै अतः हमें इनके लालन-पालन पर पूरा ध्यान देना होगा। उन्होंने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे अर्जित नई तकनीक और वैज्ञानिक ज्ञान को पशुपालक और कृषकों तक पहुँचाएं। देश में कृषि से दुगुनी आय करने में पशुधन की भूमिका भी अहम् है। समारोह की अध्यक्षता वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने करते हुए कहा कि देशी पशु नस्ल संवर्द्धन पर पहली शीतकालीन कार्यशाला इस विभाग द्वारा आयोजित की जा रही है। इनके संवर्द्धन और संरक्षण के लिए वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा प्रजनन अनुसंधान केन्द्रों पर अनुसंधान और संवर्द्धन कार्य हो रहा है। कार्यशाला से इनके प्रसार कार्यों में मदद मिलेगी। विशिष्ट अतिथि लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार के प्रमुख वैज्ञानिक डाॅ. त्रिलोक नंदा ने कहा कि प्रबंधन और नवीन तकनीक से देशी पशुधन की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। यहां के देशी गौवंश ने विदेशों में भी अपनी धाक कायम की है। अतः इनके संरक्षण और संवर्द्धन का कार्य बहुत महत्वपूर्ण है। राजुवास के छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं कार्यशाला के निदेशक प्रो. एस.सी. गोस्वामी ने कहा कि कार्यशाला में 10 राज्यों से आये वैज्ञानिक-विशेषज्ञ देशी पशु नस्लों के संवर्द्धन और संरक्षण उपायों पर आपसी चर्चा कर इनके वैज्ञानिक उन्नयन पर चिंतन करेंगे। इस कार्यशाला के नतीजों को आम पशुपालकों तक पहुँचाने में भी ये वैज्ञानिक कार्य करेंगे। इसमें प्रायोगिक कार्य और भ्रमण के साथ-साथ 125 व्याख्यान प्रस्तुत किये जायेंगे। अतिथियों ने इस अवसर पर प्रकाशित एक “ट्रेनिंग मेन्यूअल“ का भी विमोचन किया। उद्घाटन सत्र में वेटरनरी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक प्रो. आर.के. सिंह, प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. ए.पी. सिंह, स्नातकोत्तर अध्ययन के अधिष्ठाता प्रो. एस.के. कश्यप, कुलसचिव प्रो. हेमन्त दाधीच, कुलपति के प्रशासनिक सचिव प्रो. बी.एन. ऋंगी सहित विभागाध्यक्ष और फैकल्टी सदस्य भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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