विश्व रेबीज दिवस : वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन दस देशों के दो हजार प्रतिभागी हुए शामिल विद्यार्थियों की डिजीटल पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता भी हुई

विश्व रेबीज दिवस
वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन
दस देशों के दो हजार प्रतिभागी हुए शामिल
विद्यार्थियों की डिजीटल पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता भी हुई

बीकानेर, 28 सितम्बर। विश्व रेबीज दिवस पर वेटरनरी विश्वविद्यालय में सोमवार को अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, जयपुर द्वारा “भारत में एकल स्वास्थ्य दृष्टिकोण से उभरती जूनोसिस और रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण” विषय पर आयोजित वेबिनार में देश-विदेश के विशेषज्ञ व वक्ताओं ने शिरकत की। वेबिनार के लिए 2 हजार प्रतिभागियों ने अपने पंजीकरण करवाए। इंग्लैंड अमेरिका, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल सहित दस देशों में इसके प्रसारण को देखा और सुना गया। पूर्व सांसद एवं महाभारत टी.वी. सीरियल के अभिनेता एवं पशुचिकित्सक डॉ. नीतिश भारद्वाज मुख्य अतिथि रूप में शामिल हुए। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने वेबिनार को सम्बोधित करते हुए कहा कि नई जूनोटिक बीमारियों और रेबीज जैसे रोगों की प्रभावी रोकथाम के लिए पशु चिकित्सा, मेडिकल साइंस और पर्यावरण विज्ञान को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। वैश्वीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण जूनोटिक बीमारियों का प्रभाव सभी क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। मानव व पशु कल्याण के हित में ऐसी बीमारियों के नियंत्रण के लिए एकल स्वास्थ्य दृष्टिकोण से कार्य करने की जरूरत है। रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से समाज को जागरूक कर नुकसान से बचा जा सकता है। मुख्य अतिथि डॉ. नीतिश भारद्वाज ने कहा कि भारत में रेबीज प्रसार का मुख्य कारण गली-मोहल्लों के श्वान और लोक स्वास्थ्य की जागरूकता में कमी हैं। लोगों को पालतू श्वानों की तरह ही गली-मोहल्लों के श्वानों के रेबीज निरोधक टीकाकरण के प्रति भी जागरूक किया जाए। वेबिनार में दक्षिण एशिया आई.एल.आर.आई. के क्षेत्रीय प्रतिनिधि डॉ. एच. रहमान ने कहा कि वेक्सीन उपलब्ध होने के बाद भी रेबीज एक मुख्य जूनोसिस रोग बना हुआ है। एशिया और अफ्रीकी देश इससे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र है। जूनोटिक रोगों की रोकथाम के लिए मनुष्य के साथ-साथ पशु, वनस्पति और जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप एकल स्वस्थ्य के प्रयासों की जरूरत है। राजुवास के पूर्व कुलपति एवं राज्यपाल सलाहकार परिषद् के सदस्य डॉ. ए.के. गहलोत ने पशुओं के संदर्भ में भारत में रेबीज एक्शन प्लान बनाने एवं लागू करने हेतु सुझाव दिये। उन्होंने बताया कि 2020-30 तक जीरो रेबीज के प्रयासों की जरूरत है। वेबिनार के तकनीकी सत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिनिधि डॉ. बर्नाडेट अबेला (जैनेवा) ने मानव में रेबीज उन्मूलन के सकारात्मक तथ्यों की जानकारी दी। इंग्लैंड की वर्ल्ड वाईड वेटरनरी सर्विस की मिशन रेबीज के एन्डो गिब्सन ने भारत में श्वानों के रेबीज टीकाकरण से प्राथमिक उपचार के अपने अनुभव प्रस्तुत किए। भारत सरकार के एन.सी.डी.सी. जूनोटिक डिजीज डिवीजन की प्रमुख डॉ. सिम्मी तिवाड़ी ने कहा कि रेबीज रोग की शत-प्रतिशत रोकथाम की जा सकती है। हालांकि इसकी वैक्सीन 18वीं सदी में आने के बाद भी मनुष्य और पशुओं का नुकसान हो रहा है। लोगों में जागरूकता के साथ ही रोकथाम की मल्टीपल अप्रोच की जरूरत है। तकनीकी सत्र में डॉ. एस.रामानाथन (यू.एस.), नेशनल रेबीज कंट्रोल बोर्ड नई-दिल्ली के सहायक निदेशक डॉ. तुषार नेले ने भी रेबीज वन हेल्थ एप्रोच पर विचार व्यक्त किए। स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान की अधिष्ठाता प्रो. संजीता शर्मा ने वेबिनार के प्रारंभ में विषय प्रवर्तन किया। आयोजन सचिव डॉ. डी.एस. मीना ने वेबिनार का संयोजन किया। वेबिनार के तकनीकी सत्र में वेटरनरी कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. आर.के. सिंह शामिल हुए। राजुवास के अनुसंधान निदेशक प्रो. हेमंत दाधीच ने सभी का आभार व्यक्त किया। वेबिनार में एलेम्बिक फॉर्मा आई.टी. पार्टनर बना।

विद्यार्थियों की डिजीटल पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता हुई

बीकानेर, 28 सितम्बर। विश्व रेबीज दिवस पर सोमवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय में वेटरनरी कॉलेज, बीकानेर के द्वारा डिजीटल मोड पर “श्वानों द्वारा होने वाले रेबीज रोग से बचाव” विषय पर वेटरनरी विद्यार्थियों की पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। प्रतियोगिता की मुख्य आयोजन सचिव डॉ. रजनी जोशी ने बताया कि इसमें राजुवास के संघटक महाविद्यालय के विद्यार्थी शामिल हुए।