विख्यात ऊन उद्योग व भेड़ विकास के लिए वेटरनरी विश्वविद्यालय और राज. वूलन इन्डस्ट्रीज एसोसिएशन ने किया ऐतिहासिक करार

क्रमांक 498                                                     10 जनवरी, 2020

विख्यात ऊन उद्योग व भेड़ विकास के लिए वेटरनरी विश्वविद्यालय
और राज. वूलन इन्डस्ट्रीज एसोसिएशन ने किया ऐतिहासिक करार

बीकानेर, 10 जनवरी। बीकानेर के विख्यात ऊन उद्योग और भेड़ों के चहुंमुखी विकास, ऊन उत्पादों की गुणवŸाा में सुधार के लिए शुक्रवार को एक ऐतिहासिक समझौता किया गया। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा और राजस्थान वूलन इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल कल्ला ने इस बाबत आपसी सहयोग व समन्वय से कार्य करने के लिए एक आपसी करार पर दस्तखत कर दस्तावेज एक दूसरे के सुपुर्द किए। इस समझौते के तहत भेड़ व ऊन विकास के लिए अनुसंधान और उसके विकास के लिए वेटरनरी विश्वविद्यालय संसाधनों का उपयोग, तकनीकी तथा प्रशिक्षण सुविधाएं मुहैय्या करवाएगा। भेडों के स्वास्थ्य, पोषण, उम्दा किस्म का ऊन उत्पादन और कारपेट निर्माण और प्रसंस्करण तथा भेडों के ऊन अपशिष्टों को खाद रूप में उपयोगिता जैसे कार्यों पर कार्य किया जाएगा। इस अवसर पर वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि बीकानेर दूध और ऊन उत्पादन में अग्रणी है। वेटरनरी विश्वविद्यालय का प्रयास है कि इनके समुचित विकास और प्रोत्साहन के लिए पशुपालकों, उद्यमियों और व्यवसाइयों के साथ मिलकर कार्य किया जाए। आज के इस आपसी करार से एक नया अध्याय शुरू कर विश्वविद्यालय के ज्ञान और तकनीक का पूरा लाभ भेड पालकों व संस्थानों को मिल सकेगा। विश्वविद्यालय वैज्ञानिकों का दल जरूरतों का आंकलन कर आगे कार्य की रणनीति बनाकर यहां के मानव संसाधन का भी उपयोग सुनिश्चित करेगा। राजस्थान वूलन इन्डस्ट्रीज एसासिएशन के अध्यक्ष कमल कल्ला ने कहा कि वूलन यहां की हैरिटेज इन्डस्ट्री है जिसका प्रभाव समूचे क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इसके माध्यम से 50 हजार लोगों को रोजगार और 10 हजार करोड रूपये राशि के गलीचे निर्यात होते हैं। इस करार से भेड़ व ऊन क्रांति लाने में सफलता मिलेगी। डाॅ. एस.पी. जोशी ने नाइट्रोजन युक्त ऊन के अपशिष्ट से खाद निर्माण की संभावनाओं पर विचार रखे। इस अवसर पर वेटरनरी विश्वविद्यालय की पी.एम.ई. निदेशक प्रो अंजु चाहर, विशेषाधिकारी प्रो. आर.के धूडिया, डाॅ. गोविन्द सिंह, प्रो. राजीव जोशी, डाॅ. एस.के. झीरवाल, डाॅ. दिनेश जैन भी उपस्थित थे। इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधि राजेश दुजारी, साजिद संुलेमानी, गौरीशंकर सोमानी और सचिव जय सेठिया भी मौजूद रहे।

सह-समन्वयक
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