वल्र्ड वेटरनरी डेः पशुधन उत्पादों की गुणवत्ता, शुद्धता जांच की सरल विधियां आमजन तक पहुँचेः कुलपति प्रो. छीपा

क्रमांक 13                                                                                      28 अप्रैल, 2018

वल्र्ड वेटरनरी डेः विजेताओं को पुरस्कार
पशुधन उत्पादों की गुणवत्ता, शुद्धता जांच की सरल विधियां आमजन तक पहुँचेः कुलपति प्रो. छीपा

बीकानेर, 29 अप्रैल। वेटरनरी विश्वविद्यालय में “स्थाई विकास के लिए लोगों की आजीविका बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा और संरक्षा” में पशुचिकित्सा व्यवसाय की भूमिका“ थीम पर “विश्व पशुचिकित्सा दिवस“ शनिवार को समारोह पूर्वक आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने इस दिवस पर आयोजित वेटरनरी छात्र-छात्राओं की भाषण, क्विज और पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। समारोह को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रो. छीपा ने कहा कि इस महान दिवस पर पशुचिकित्सकों और छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि पशुचिकित्सा में शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और चिकित्सकों ने अनूठी उपलब्धियां अर्जित की हैं। पशुओं से प्राप्त होने वाले आहार और उप उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता की चुनौतियां हमारे सामने हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि इन उत्पादों की शुद्वता जांच की छोटी विधियां आमजन तक पहुँचाने की जरूरत है। उन्होंने युवा छात्र-छात्राओं को सैद्वांतिक कार्यों के साथ-साथ प्रायोगिक कार्यों में भी दक्षता हासिल करने का आह्वान किया। प्रो. छीपा ने कहा कि पशु स्वस्थ होगा तो सभी स्वस्थ होंगे। देषी पशुओं की अद्बुत उत्पादन क्षमता को वैज्ञानिक तौर-तरीकों से बढ़ाए जाने की अच्छी संभावनाएं हैं। वेटरनरी विष्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. हेमंत दाधीच ने स्वागत भाषण में विष्व पशुचिकित्सा दिवस के उद्देष्यों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रति वर्ष होने वाले पांच संक्रमण रोगों में से एक जूनोटिक रोग होता है अतः पशुचिकित्सा व्यवसाइयों का समाज के प्रति भी उत्तरदायित्व है। पशुपालन और उसके उत्पादों का वैष्विक बाजार उपलब्ध है और विष्व के 20.5 मिलियन लोग पशुधन सेक्टर पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव के चलते घरेलू आय में वृद्धि, गरीबी उन्मूलन, भूमि की उर्वरकता बनाए रखने और परिवर्तन जैसे कार्यों में पशुधन हमारा विष्वसनीय साथी बना रहेगा। राजुवास के पी.एम.ई. निदेषक प्रो. राकेष राव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। राजुवास के सहायक प्राध्यापक डाॅ. अषोक गौड़ ने विष्व पशुचिकित्सा दिवस-2018 की थीम पर पावर प्रजेन्टेषन द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किया। राजुवास के निदेषक क्लिनिक्स प्रो. जे.एस. मेहता ने सभी का आभार जताया। डाॅ. प्रतिष्ठा शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। समारोह में फैकल्टी सदस्य और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

क्विज, पोस्टर व भाषण प्रतियोगिता विजेता हुए पुरस्कृत
भाषण प्रतियोगिता- में पुष्पा शर्मा प्रथम, अखिल तिवाड़ी द्वितीय और रोहिताष परिहार तृतीय रहे।
पोस्टर प्रतियोगिता में गरिमा कालरा प्रथम, पुष्पा शर्मा द्वितीय और सत्यवीर मोखरिया तृतीय विजेता रहे।
क्विज़्ा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर- नरेंद्र सिंह, पुष्पा, ओम प्रकाश मील, यतींद्र सिंह सेंगर और पायल मीणा की टीम और द्वितीय स्थान पर नरेंद्र सिंह, हिना पंवार, केशव गौड़, गरिमा कालरा और सौरभ खत्री की टीम को पुरस्कृत किया गया।

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