विश्व जूनोटिक डे पर वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित निःशुल्क रेबीज शिविर में 75 श्वानों का टीकाकरण व जयपुर स्नातकोत्तर संस्थान में सेमीनार आयोजित

क्रमांक 1674                                                                                                 6 जुलाई, 2017

“वल्र्ड जूनोटिक डे“

विश्व जूनोटिक डे पर वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित
निःशुल्क रेबीज शिविर में 75 श्वानों का टीकाकरण

बीकानेर 6 जुलाई। “वल्र्ड जूनोटिक डे“ के अवसर पर गुरूवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय की मेडिसिन क्लिनिक्स में निःशुल्क श्वान रेबीज टीकाकरण शिविर में 75 श्वानोें का टीकाकरण करके 50 पशुपालकों को नए टोकन आंवटित किये। 25 पुराने टोकन का नवीनीकरण किया गया। एक दिवसीय शिविर वेटरनरी काॅलेज और केनाइन वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। विश्व जूनोटिक दिवस पर आयोजित गोष्ठी में वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि पशुओं से मनुष्य में फैलने वाली बीमारियों को जूनोटिक रोग कहा जाता है। पूरे विश्व भर में इस प्रकार की करीब 150 बीमारियां हैं। इनमें रेबीज, ब्रूसेलोसिस, क्यूटेनियस लिसमैनियसिस, प्लेग, टी.बी., टिक पैरालाइसिस, गोल कृमि, साल्मोनिलोसिस जैसी बीमारियां शामिल हैं। इनमें कई बीमारियां प्राणघातक होती हैं परन्तु समय पर उपचार और इनसे बचाव किया जा सकता है। समय पर टीकाकरण से इनको रोका जा सकता है। गोष्ठी में डाॅ. जे.पी. कच्छावा ने पालतू पशुओं में जूनोटिक बीमारियों पर पावर प्रजेन्टेशन दिया। विभागाध्यक्ष एवं शिविर प्रभारी प्रो. डी.के. बिहानी ने बताया कि वेटरनरी क्लिनिक्स में आयोजित इस विशेष चिकित्सा शिविर में 100 से भी अधिक श्वानपालक पहुँचे। बीमारियों से बचाव और जागरुक करने के लिए गोष्ठी का आयोजन करके श्वान पालकों को मुद्रित साहित्य का भी वितरण किया गया। शिविर में केनाइन वेलफेयर सोसाइटी के सचिव प्रो. अनिल आहूजा, प्रो. आर.के. तंवर, डाॅ. दीपिका धूडिया, डाॅ. एस.के. व्यास सहित स्नातकोत्तर छात्रों डाॅ. जीतेन्द्र तंवर, डाॅ. गौरव जैन और इन्टर्नशिप के नरेन्द्र सिंह, नरेन्द्र चैधरी, मनफूल, मयंक, नुरूल, मुकेश कुमार और ओमप्रकाश मीणा ने शिविर में सेवाएं प्रदान की। इन्डियन इम्यूनोलाॅजीकल प्रा.लि., हैदराबाद ने शिविर के लिए सहयोग प्रदान किया।

विश्व जूनोटिक दिवस: राजुवास के जयपुर स्नातकोत्तर संस्थान में सेमीनार आयोजित

जयपुर, 6 जुलाई। विश्व जूनोटिक दिवस के अवसर पर गुरूवार को जूनोटिक रोगों का निदान, निगरानी और प्रतिक्रिया केन्द्र द्वारा स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, (पी.जी.आई.वी.ई.आर.) जयपुर में एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमीनार का षुभारम्भ संस्थान के अधिष्ठाता डाॅ. विष्णु शर्मा एवं परियोजना के मुख्य अन्वेषक डाॅ. डी.एस. मीना ने किया। संस्थान के अधिष्ठाता डाॅ. शर्मा ने सभी लोगों से साफ-सफाई का विषेष ध्यान रखते हुये बीमारियों से बचाव के लिये टीकाकरण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया और समाज में पषुचिकित्सकों के कर्तव्यों की जानकारी दी। डाॅ. डी.एस. मीना ने व्याख्यान देकर पषुपालकों को जूनोटिक (पशुजन्य) बीमारियों, उनके उपचार एवं बचाव के बारे में बताया। डाॅ. मीना ने कहा कि विष्वभर में मनुष्यों में होने वाले रोगों में से लगभग 60 प्रतिषत (लगभग 150) रोग पषुजन्य होते हैं। इनमें से अधिकतर बीमारियां भारतवर्ष में पायी जाती हंै। जिनमें मुख्यतः रेबीज, बर्ड-फ्लू, बू्रसैलोसिस, स्वाईन फ्लू, प्लेग, साल्मोनेलासिस, स्केबीज आदि हैं। रेबीज (जलातंक) से भारतवर्ष में लगभग 30 हजार लोगों की मृत्यु हो जाती है। डाॅ.मीना ने सभी संभागियों को साफ-सफाई व बचाव के तरीकों की जानकारी दी। सहायक आचार्य एवं परियोजना के सह-अन्वेषक डाॅ. विकास गालव ने संस्थान के छात्र/छात्राओं एवं षिक्षकों को एक तकनीकी व्याख्यान द्वारा विष्वभर में वर्तमान समय में उत्पन्न होने वाली नई जूनोटिक बीमारियों के खतरे एवं उन पर चल रहे नवीनतम शोध कार्यों से अवगत करवाया। साथ ही उन्होंने संस्थान में चल रही परियोजना जूनोटिक रोगों को निदान, निगरानी और प्रतिक्रिया केन्द्र के उद्देष्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम में 100 से अधिक लोगों ने भाग लिया जिनमें से 50 पशुपालक एवं 50 से अधिक छात्र/छात्रायें और संकाय सदस्य शामिल थे। डाॅ. संदीप शर्मा ने समस्त प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का तकनीकी संचालन डाॅ. निर्मल कुमार जेफ द्वारा किया गया।

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जनसम्पर्क प्रकोष्ठ