राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चौपाल हरा चारा पशुओं में सही प्रजनन और उत्पादन के लिए जरूरी

राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चौपाल
हरा चारा पशुओं में सही प्रजनन और उत्पादन के लिए जरूरी

बीकानेर, 24 मार्च। वेटरनरी विश्वविद्यालय की राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चौपाल बुधवार को आयोजित की गई। पशुपालन में हरे चारे के महत्व विषय पर चौपाल में पशु पोषण विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार धूड़िया और निदेशक, आयुर्वेट लिमिटेड, नई दिल्ली डॉ. अनूप कालरा किसान और पशुपालकों से रू-बरू हुए। वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. धूड़िया ने कहा कि हरा चारा विटामिन्स का एक भरपूर स्त्रोत है जिसमे प्रोटीन और एन्टी-ऑक्सीडेन्ट भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं अतः पशुओं की प्रजनन और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रतिदिन 15-20 किलोग्राम हरे चारे की मात्रा उनके आहार में सम्मिलित करना जरूरी है। आयुर्वेट लिमिटेड के निदेशक और पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. अनूप कालरा ने बताया कि मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की खासतौर पर कार्बन तत्व की कमी हो रही है अतः हरा चारा उत्पादन के बाद सूखा चारा और खनिज लवण मिलाकर पशुओं को खिलाने से ही वांछित लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इसमें दालों की चूरी, खल और अनाज की चापड़ को मिलाने से यह एक संतुलित आहार के रूप में पशुओं के लिए अत्यंत लाभप्रद और उत्पादन को बढ़ाने वाला बन जाता है। हरे चारे को कुट्टी बनाकर खिलाने से यह आहार अत्यंत स्वादिष्ट और सरलता से पाचन योग्य बन जाता है। फलीदार फसलों के चारे में प्रोटीन और अनाज के चारे में कार्बोहाइडेªट जैसे पोषक तत्व मिलते हैं, यह एक वैज्ञानिक तथ्य है। हरे चारे के लिए फसल की कटाई फूल आने से पहले किया जाना चाहिए। पौष्टिक हरे चारे के उत्पादन के लिए किसानों को खेतों में गोबर की खाद व की उपयोगिता को बढावा देना चाहिए। हरे चारे की भरपूर पैदावार होने पर इसे भविष्य के लिए सुरक्षित और संरक्षित किए जाने की वैज्ञानिक विधियां मौजूद हैं, इन्हें पशुपालकों द्वारा अपनाए जाने की जरूरत है। डॉ. कालरा ने बताया कि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में बिना मिट्टी के ही कम पानी और स्थान पर वर्ष पर्यन्त हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। इसमें कीटनाशक व जीवाणु नाशक भी नहीं मिलाये जाते हैं। यह स्वचालित मशीन या फिर मोडिफाईड हाइड्रोपोनिक्स विधि से तैयार किया जा सकता है। ई-पशुपालक चौपाल में राज्य भर के पशुपालक-किसान विश्वविद्यालय के अधिकारिक फेसबुक पेज से जुडे़।