राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चौपाल थनैला रोग के वैज्ञानिक तथ्यों और बचाव पर प्रो. गहलोत की विशेषज्ञ वार्ता

राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चौपाल
थनैला रोग के वैज्ञानिक तथ्यों और बचाव
पर प्रो. गहलोत की विशेषज्ञ वार्ता

बीकानेर, 28 अक्टूबर। वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा बुधवार को पशुओं में पशुओं में थनैला रोग: कारण एवं निवारण पर राज्य स्तरीय ई-पशुपालक चौपाल का आयोजन किया गया। पशुपालक चौपाल को सम्बोधित करते हुए वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा ई-पशुपालक चौपाल वेटरनरी विश्वविद्यालय का एक अभिनव कार्यक्रम है जो देश में विशिष्ट है। इसके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के द्वारा पशुपालकों की शंकाओं का समाधान और विशेषज्ञों वार्ताएं इसकी खासियत है। विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के माध्य से पशुपालक वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों से कभी भी संपर्क कर सकते हैं। ई-पशुपालक चौपाल में विशेषज्ञ रूप से आमंत्रित पूर्व कुलपति एवं राज्यपाल सलाहकार परिषद् के सदस्य प्रो. ए.के. गहलोत ने थनैला के रोग के कारण और बचाव के बारेा में सरगर्भिता और सरल रूप से वैज्ञानिक तथ्यों का खुलासा कर पशुपालकों को लाभान्वित किया। कहा कि देश में थनैला रोग जीवाणु संक्रमित दुधारू पशुओं से 10 से 15 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन में कमी होने का अनुमान है। यह रोग दूध दुहने वाले हाथों व जमीन-मिट्टी के द्वारा फैल सकता है। अतः स्वच्छता रखना ही इससे बचाव है। सी.एम.टी. द्वारा रोग की जांच की जा सकती है। इसका उपचार पशुचिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। प्रो. गहलोत ने इस रोग को लेकर पशुपालकों की शंकाओं का समाधान भी किया। राजुवास के प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. आर.के. धूडिया ने चौपाल का संचालन किया। प्रो. धूड़िया ने बताया कि प्रत्येक माह के दूसरे और चौथे बुधवार को श्रृंखलाबद्ध ई-पशुपालक चौपाल से राज्यभर के किसान और पशुपालक लाभान्वित हो रहे हैं। राजुवास के अधिकारिक फेसबुक पेज से इसका सीधा प्रसारण देखा व सुना जा सकता है।