राज्य में तकनीकी प्रसार के लिए पीपीके हैल्थ केयर के वैज्ञानिकों का दल आपसी सहयोग के लिए पहुँचा राजुवास

क्रमांक 2019                                                                                                                        12 मार्च, 2018

राज्य में तकनीकी प्रसार के लिए
पीपीके हैल्थ केयर के वैज्ञानिकों का दल आपसी
सहयोग के लिए पहुँचा राजुवास

बीकानेर, 12 मार्च। राज्य में पशु विज्ञान तकनीकी के प्रसार के आपसी सहयोग के लिए पीपीके एनीमल साईंसेज प्रा. लि. के वैज्ञानिकों का एक दल सोमवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय पहुँचा। यह पीपीके हैल्थ केयर इन्स संयुक्त राज्य अमेरिका की सहायक कंपनी है और राजुवास के साथ आपसी हितों में सहयोग की इच्छुक है। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा की अध्यक्षता में सोमवार को कुलपति सचिवालय में आयोजित एक बैठक में पशुपालन तकनीकी के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। पीपीके हैल्थ केयर के पशुपालन वैज्ञानिक एलेक्स मेरविस ने कंपनी के नव तकनीकी कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। दल में पीपीके उपाध्यक्ष मार्टिन ए हेले, डायरेक्टर सैम वाडेजकी, जसप्रीत सिंह बिन्द्रा, होमंग पारिख और दिनेश शामिल थे। इस अवसर पर कुलपति प्रो. छीपा ने पशु उत्पादन में वृद्धि के लिए सस्ती और सुलभ तकनीक के प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता और संकाय अध्यक्ष प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने बताया कि राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान से गर्भधारण की अवधि को कम करने, शीघ्र गर्भाधारण टेस्ट की तकनीक, सेक्स सीमन और देशी गोवंश के जर्मप्लाज्म के प्रसार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के क्षेत्र में तकनीकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग की अच्छी संभावनाएं हैं। विचार-विनिमय में बायोटेक्नोलाॅजी के विभागाध्यक्ष प्रो. एस.के. कष्यप, अनुसंधान निदेशक प्रो. आर.के. सिंह, जनस्वास्थ्य के विभागाध्यक्ष प्रो. राकेष राव, शरीर क्रिया विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो. नलिनी कटारिया, बायोटेक्नोलाॅजी के प्रो. ए.के. कटारिया, प्रसार षिक्षा निदेशक प्रो. ए.पी. सिंह और मादा एवं प्रसूति रोग विभाग के प्रो. जी.एन. पुरोहित ने भाग लिया। डीन-डायरेक्टर और अन्य विभागाध्यक्ष बैठक में शामिल हुए। बैठक के अंत में राजुवास के कुलसचिव प्रो. हेमन्त दाधीच ने सभी का आभार जताया। वैज्ञानिकों के दल ने वेटरनरी काॅलेज के विभिन्न विभागों में हो रहे अनुसंधान कार्यों और प्रयोगषाला में उपलब्ध संसाधनों को देख कर जानकारी प्राप्त की ।दल के सदस्यों ने राजुवास के पशुधन अनुसंधान केन्द्र बीछवाल और कोडमदेसर जाकर देषी गोवंश के संवर्द्धन और संरक्षण कार्यों का भी जायजा लिया।

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