राजुवास में पशु आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय सेमीनार सम्पन्न

क्रमांक 2022                                                                                                                        14 मार्च, 2018

राजुवास में पशु आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय सेमीनार सम्पन्न
राज्य के पशु चिकित्सालयों में वेटरनरी इमरजेन्सी
रैसपांस टीमों के गठन की अभिशंषा

बीकानेर, 14 मार्च। वेटरनरी विश्वविद्यालय में “पशुओं के आपदा प्रबंधन में नवीन विकास और रणनीतियां“ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार बुधवार को संपन्न हो गई। राजुवास के पशु आपदा प्रबंधन तकनीकी केन्द्र द्वारा आयोजित सेमीनार के समापन सत्र में 10 से भी अधिक पत्र वाचन प्रस्तुत किये गए। समापन सत्र के मुख्य अतिथि वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने सभी संभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस सत्र में वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की डाॅ. मोनिका गुप्ता, सीमा सुरक्षा बल के डाॅ. विनय यादव, इण्डो-तिब्बत सीमा बल और नेशनल डिजास्टर रैसपांस फोर्स के अधिकारियों ने शिरकत कर पत्र वाचन किया। राजुवास पशु आपदा प्रबंधन तकनीक केन्द्र के प्रमुख अन्वेषक और सेमीनार के संयोजक डाॅ. प्रवीन बिश्नोई ने बताया कि सेमीनार में केन्द्र द्वारा वेटरनरी विश्वविद्यालय में आपदा प्रबंधन पर एक म्यूजियम और लाइब्रेरी की स्थापना किए जाने की आवश्यकता जताई गई। राजुवास में किसान और पशुपालकों के हित में पशु आपदा के प्रबंधन पर नए माॅडल विकसित किए जाने पर सहमति व्यक्त की गई। वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक आपदाओं के समय सूखे और हरे चारे के भंडारण की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। सेमीनार में वेटरनरी विश्वविद्यालय के सभी संघटक महाविद्यालयों सहित राज्य के पशु चिकित्सालयों में वेटरनरी इमरजेन्सी रैसपांस टीमों के गठन करने की अभिशंषा की गई। राजुवास का पशु आपदा प्रबंधन तकनीक केन्द्र राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई दिल्ली से समन्वय स्थापित कर वित्तीय संसाधन मुहैय्या करवाने के लिए प्रयास करेगा। सेमीनार में बीकानेर जिले के 25 प्रगतिशील पशुपालकों ने भी वैज्ञानिकों से संवाद स्थापित कर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। पत्र वाचन प्रस्तुत करने वालों में डाॅ. टी.के. गहलोत, डाॅ. ए.के. कटारिया, डाॅ. प्रवीन बिशनोई, डाॅ. एस.के. झीरवाल, डाॅ. अषोक गौड़, कर्नल हर्ष शर्मा, डाॅ. अमर सिंह राठौड़, डाॅ. आर.के. तँवर, डाॅ. अनिल कुमार छंगाणी, डाॅ. ए.के. बिश्नोई, डाॅ. राकेश रंजन, डाॅ. मंजू नेहरा, डाॅ. दिव्यम जाजोरिया, डाॅ. यिावंागी जोरवाल और डाॅ. अरूण कुमार झीरवाल शमिल थे।

निदेशक