राजुवास में जी.एस.टी. पर कार्यशाला सम्पन्न व्यापक जनहित में एकल टैक्स पद्धति हमारे लिए लाभकारीः कुलपति प्रो. छीपा

क्रमांक 1855                                                                                                                              23 जनवरी, 2018
राजुवास में जी.एस.टी. पर कार्यशाला सम्पन्न
व्यापक जनहित में एकल टैक्स पद्धति हमारे
लिए लाभकारीः कुलपति प्रो. छीपा

बीकानेर, 23 जनवरी। जी.एस.टी. के विभिन्न प्रावधानों और जागरूकता के लिए वेटरनरी विश्वविद्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को किया गया। कुलपति सचिवालय के सभागार में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने कहा कि देश में जी.एस.टी. को व्यापक जनहित में एकल टैक्स पद्धति लागू करने का महत्वपूर्ण कार्य हुआ है। माननीय कुलाधिपति के निर्देश पर इस प्रणाली की बारीकियों को समझ कर पूरी शिद्दत के साथ कार्य करने के लिए दूसरी बार कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के सभी डीन-डायरेक्टर, आहरण-वितरण अधिकरियों, विश्वविद्यालय से जुड़े कारोबारियों/व्यापारियों और राजुवास मित्रों ने शिरकत की। वाणिज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त रामेन्द्र शर्मा ने बताया कि आहरण-वितरण अधिकारियों को टी.डी.एस. कटौति का कार्य आगामी अप्रैल 2018 से करना है। इसमें जी.एस.टी. के लिए अन्य प्रांतों से आने वाले माल के लिए इ-वे बिल का भी प्रावधान किया गया है। कार्यशाला में वाणिज्य कर अधिकारी (एस.टी.ओ.) राजकमल बिश्नोई ने जी.एस.टी के व्यापक प्रावधानों का पावर प्रजेन्टेशन प्रस्तुत कर इसके प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आई.टी. साफ्टवेयर के माध्यम से जी.एस.टी. पंजीकरण का कार्य किया जा रहा है। आहरण-वितरण अधिकारियों द्वारा टी.सी.एस./ टी.डी.एस. कटौति का कार्य 31 मार्च 2018 तक स्थगित है। जी.एस.टी. से आम आदमी और व्यापारियों को बहुत फायदा है और यह देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने और जी.डी.पी. को बढ़ाने वाली एकल कर प्रणाली है। यह एक राष्ट्र बाजार और अन्र्तराष्ट्रीय व्यापार को भी बढ़ावा और फायदा पहुँचाने का कार्य है। उन्होंने इसके सरल प्रावधानों, पात्रता तथा अन्य प्रक्रियागत जानकारी से अवगत करवाया। जी.एस.टी. में लापरवाही और अनियमितता के लिए दंडात्मक प्रावधान भी किए गए हैं। कार्यशाला में वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने सभी अधिकारियों को इसके प्रावधानों के अनुकूल सचेष्ट रहकर कार्य करने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. हेमन्त दाधीच ने प्रारंभ में कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी। कार्यशाला में वित्त नियंत्रक श्री अरविन्द बिश्नोई सहित डीन-डायरेक्टर, राजुवास मित्र और विश्वविद्यालय से सम्बद्ध व्यापारियों ने भी भाग लिया।

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