राजुवास में अनुसंधान और प्रसार शिक्षा परिषदों की बैठक सम्पन्न, वेटरनरी वैज्ञानिकों के प्रयासों से राजस्थान पशुपालन में देश का सर्वाधिक समृद्ध राज्य बनाः कुलपति प्रो. गहलोत, “वाईस मैसेज सेवा“ से जुडेंगे 10 लाख कृषक और पशुपालक

क्रमांक 1655                                                                                                               18 जून, 2017

राजुवास में अनुसंधान और प्रसार शिक्षा परिषदों की बैठक सम्पन्न
वेटरनरी वैज्ञानिकों के प्रयासों से राजस्थान पशुपालन में देश का सर्वाधिक समृद्ध राज्य बनाः कुलपति प्रो. गहलोत
“वाईस मैसेज सेवा“ से जुडेंगे 10 लाख कृषक और पशुपालक

बीकानेर, 18 जून। वेटरनरी विश्वविद्यालय की अनुसंधान और प्रसार शिक्षा परिषदों की दो अलग-अलग बैठक रविवार को कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत की अध्यक्षता में आयोजित की गई। कुलपति सचिवालय सभागार में बैठक को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रो. गहलोत ने कहा कि राज्य में वेटरनरी विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद सात वर्षों में पशुपालन क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान और प्रसार शिक्षा कार्यों के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि गत सात वर्षों में राज्य का दुग्ध उत्पादन वर्ष 2003 से 2010 के मुकाबले 160 प्रतिशत बढ़ा है जो अब 21 मिलियन मैट्रिक टन प्रतिवर्ष हो गया है। राज्य के कुल दुग्ध उत्पादन से पशुपालकों को वर्ष में लगभग 50 हजार करोड़ रू. की आय हुई होती है। इस अवधि में अंडा उत्पादन भी गत वर्षों के मुकाबले 218 प्रतिशत और मांस उत्पादन भी 170 प्रतिशत तक बढ़ा है। वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा स्वदेशी गौवंश के वैज्ञानिक संवर्द्धन और संरक्षण उपायों की बदौलत देशी गौवंश में गत 7 वर्षों में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और भैंस वंश की उत्पादकता में 314 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बकरी के दूध की उत्पादकता में 307 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य की विख्यात देशी गौवंश की उत्पादक क्षमता में तेजी से बढ़ोतरी के कारण अन्य राज्यों में इसके जर्म प्लाज्म की मांग बढ रही है। कुलपति प्रो. गहलोत ने बताया कि राजुवास गौवंश में भू्रण प्रत्यारोपण और इन विट्रो फर्टिलाईजेशन तकनीक का उपयोग कर राज्य में दुग्ध क्रांति लाने के लिए प्रयत्नशील है। उन्होंने बताया कि राजुवास ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एन.डी.डी.बी.), करनाल के साथ मिलकर राज्य की थारपारकर गौ नस्ल का भू्रण प्रत्यारोपण कांकरेज बछड़ियों में सफलतापूर्वक किया गया है। आगामी जनवरी 2018 तक भू्रण प्रत्यारोपित बछडे-बछडियां प्राप्त की जा सकेगी। इस तकनीक से एक गाय से 25 से 50 तक संतति प्राप्त की जा सकेगी जिसकी दुग्ध उत्पादकता 3500 लीटर प्रतिवर्ष तक हो सकती है। बैठक में विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं के प्रमुख अन्वेषकों ने प्रगति-प्रतिवेदन के प्रजेन्टेशन प्रस्तुत किए। कुलपति प्रो. गहलोत ने अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा कर दिशा-निर्देश प्रदान किए। अनुसंधान निदेशक प्रो. राकेश राव सहित विभिन्न परियोजनाओं के प्रमुख अन्वेषकों ने प्रगति के पाॅवर प्रजेन्टेशन प्रस्तुत किए।
प्रसार शिक्षा परिषद् की बैठक में प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. आर.के. धूड़िया ने प्रगति-प्रतिवेदन का पाॅवर प्रजेन्टेशन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2016-17 की अवधि में राज्य के जिलों में 827 कार्यक्रम आयोजित कर साढे़ सत्ताईस हजार कृषक-पशुपालकों को पशुपालन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया। बैठक में कुलपति प्रो. गहलोत ने कहा कि विभिन्न जिलों में विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्रों से गांव-ढांणी तक पशुपालन विशेषज्ञ सेवाएं पहुँच रही है। वेटरनरी विश्वविद्यालय अगले 2-3 वर्षों में एक लाख पशुपालकों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ेगा। राजुवास रिलायन्स फाउन्डेशन के सहयोग से “वाईस मैसेज सेवा“ के माध्यम से राजुवास डेढ़ लाख कृषक-पशुपालकों से जुड गया है। अगले वर्ष तक 10 लाख लोगों तक वैज्ञानिक पशुपालन सेवाओं को पहुँचाने का लक्ष्य है। प्रसार शिक्षा की बैठक में वी.यू.टी.आर.सी. प्रभारी अधिकारियों ने अपने प्रगति-प्रतिवेदन प्रस्तुत किए। बैठक में कुलसचिव बी.आर. मीणा, वित्त नियंत्रक श्री अरविन्द बिश्नोई, वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. जी.एस. मनोहर, प्रो. विष्णु शर्मा, अनुसंधान और प्रसार शिक्षा परिषदों के सदस्य प्रो. जी.एन. माथुर, श्री अरविन्द ओझा, श्री नरेन्द्र सिंह तंवर, श्री श्रीगोपाल उपाध्याय, श्री आज्ञाराम सिंह सहित डीन-डायरेक्टर, पशुधन अनुसंधान और पशुचिकित्सा प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्रों के प्रभारी अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

वेटरनरी विश्वविद्यालय की प्रबंध मण्डल और अकादमिक परिषद
की बैठक सोमवार (19 जून) को होगी

बीकानेर, 18 जून। वेटरनरी विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद् की 11वीं बैठक सोमवार (19 जून) को प्रातः 10ः30 बजे से और इसी दिन प्रबंध मण्डल की 18वीं बैठक दोपहर 11ः15 बजे कुलपति सचिवालय के सभागार में शुरू होगी।

समन्वयक
जनसम्पर्क प्रकोष्ठ