भारतीय पशु-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान और राजुवास के बीच उच्च शिक्षा में शोध के लिए हुआ आपसी करार

क्रमांक 1649                                                                        15 जून, 2017

भारतीय पशु-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान और राजुवास के बीच उच्च शिक्षा में शोध के लिए हुआ आपसी करार

बीकानेर, 15 जून। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर (उत्तर प्रदेश) और वेटरनरी विश्वविद्यालय ने पशु चिकित्सा में उच्च शिक्षा और अनुसंधान में आपसी सहयोग और समन्वय के लिए एक करार (एम.ओ.यू.) किया है। इसके लिए वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत और आई.वी.आर.आई. के निदेशक डाॅ. आर.के. सिंह ने दस्तखत किए हैं। प्रारम्भ में यह करार 5 वर्ष के लिए किया गया है और इसे बाद में आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकेगा। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के.गहलोत ने बताया कि पूर्व में कुछ वर्षों से भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान के साथ वेटरनरी विश्वविद्यालय शैक्षणिक और अन्य गतिविधियों में एक साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। नए करार से दोनों संस्थानों के स्नातकोत्तर (एम.वी.एस.सी. और पी.एचडी.) छात्र-छात्राओं को उच्च शोध कार्यों के लिए एक-दूसरे संस्थानों में जाकर कार्य करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि अग्रिम अनुसंधान के लिए आपसी हित के अनुसंधान के लिए उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, प्रयोशालाओं और विषय विशेषज्ञों की सेवाओं का लाभ लिए जाने का प्रावधान इस करार में किया गया है। आई.वी.आर.आई. के प्रायोगिक कार्यों, फील्ड ट्राॅयल्स और उत्पादों के लिए राजुवास ने राज्य में स्थापित अपने नेटवर्क का उपयोग करने पर भी सहमति व्यक्त की है। विद्यार्थियों के शोध से संबद्ध तकनीकी कार्य दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों की सहमति के बाद ही शुरू किये जा सकेंगे। संयुक्त शोध परिणामों के बौद्धिक सम्पदा और उनके प्रकाशनों पर दोनों संस्थानों को समान अधिकार रहेगा। कुलपति प्रो. गहलोत ने बताया कि राजुवास ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के संस्थानों, विश्वविद्यालयों और देश के ख्यातनाम संस्थानों से आपसी करार करके विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक और अनुसंधान के नए अवसर और पशुचिकित्स में शोध में नए आयाम स्थापित किए हैं।

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