फील्ड पशुचिकित्सकों ने सीखी डॉयग्नोस्टिंग इमेजिंग तकनीकें सतत् ऑनलाइन सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम में देश-विदेश के 127 प्रतिभागी हुए शामिल

फील्ड पशुचिकित्सकों ने सीखी डॉयग्नोस्टिंग इमेजिंग तकनीकें
सतत् ऑनलाइन सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम में देश-विदेश के
127 प्रतिभागी हुए शामिल

बीकानेर, 24 जुलाई। पशु शल्य चिकित्सा में विभिन्न डॉयग्नोस्टिंग इमेजिंग विषय पर पशुचिकित्सकों का पांच दिवसीय सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुक्रवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय में संपन्न हो गया। सतत् पशुचिकित्सा शिक्षा के तहत मानव संसाधन विकास निदेशालय राजुवास द्वारा आयोजित ऑनलाइन पाठ्यक्रम में 127 प्रतिभागियों ने शिरकत की। इसमें नाईजीरिया, यू.ए.ई., बांग्लादेश, इथियोपिया व भूटान देशों के अलावा देश के 22 राज्यों के पशुचिकित्सक और पैरावेट्स शामिल हुए। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने बताया कि वेटरनरी विश्वविद्यालय ने फील्ड में कार्यरत पशुचिकित्सकों के ज्ञान व कौशल में अभिवृद्धि के लिए पशुचिकित्सा की विभिन्न विधाओं में 4 सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। डॉयग्नोस्टिक इमेजिंग के पहले पाठ्यक्रम में राजुवास में उपलब्ध पशुचिकित्सा की आधुनिकतम तकनीक और उपकरणों की मदद से विशेषज्ञ सेवाओं का लाभ देश में ही नहीं अपितु विदेशों में बैठे पशुचिकित्सकों तक पहुंचाना हमारी विशिष्ट उपलब्धि है। राजुवास के सर्जरी एवं रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण बिश्नोई ने बताया कि प्रतिभागियों को एक्स रे, सोनोग्राफी, सी.टी. स्केन द्वारा पशुओं में रोग निदान तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस कोर्स में विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, पशुपालन विभाग के पशुचिकित्सक, निजी पशुचिकित्सक एवं अन्य राज्यों के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने भाग लिया। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण बिश्नोई के अलावा डॉ. साकार पालेचा और डॉ. महेन्द्र तँवर ने व्याख्यान प्रस्तुत किए। राजुवास के मानव संसाधन विकास निदेशक डॉ. ए.के. कटारिया ने बताया कि अब 3 ऑनलाइन पाठ्यक्रम के अर्न्तगत छोटे व बड़े पशुओं में फ्रेक्चर प्रबन्धन की विभिन्न तकनीक, वेटरोलीगल केस में हड्डियों के आधार पर पशु प्रजाति की पहचान तथा गायों व भैंसों में होने वाले बांझपन एवं इसके निवारण विषय पर प्रशिक्षण होंगे। इच्छुक प्रशिक्षणार्थी विश्वविद्यालय की वेबसाईट पर दिये गये निर्देशानुसार अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते है। प्रशिक्षण के उपरान्त सभी प्रशिक्षार्थियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किये गए।