पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान महाविद्यालय, नवानियां, उदयपुर स्थित पशुधन अनुसंधान केंद्र, वल्लभनगर पशुपालन प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी का समापन

पशुपालन प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी का समापन

नवानियां 06 मार्च। पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान महाविद्यालय, नवानियां, उदयपुर स्थित पशुधन अनुसंधान केंद्र, वल्लभनगर पर सूरती भैंस परियोजना ईकाई द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली की अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत आयोजित तीन एक दिवसीय पशुपालक प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी का समापन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार जोशी ने पशुपालकों को बताया कि उच्च गुणवता युक्त सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराने पर उच्च लक्षणों वाली संतति प्राप्त की जा सकती है। पशुपालक वैज्ञानिक पशु प्रबंधन के साथ-साथ नवीन पशुपालन तकनीकों को अपनाकर इन संततियों द्वारा अधिक उत्पादन और मुनाफा प्राप्त कर सकते है। प्रशिक्षण शिविर में प्रमुख विषय विशेषज्ञों प्रो. (डॉ.) आर.के. नागदा, डॉ. एस.के. शर्मा, डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. मीठा लाल गुर्जर, डॉ. मुकेश चंद शर्मा, डॉ. गोवर्धन सिंह ने वैज्ञानिक पशुपालन और प्रबंधन विषय के विभिन्न आयामों पर अपने विचार पशुपालकों के साथ साझा किए। वैज्ञानिकों द्वारा पशुपालकों को हरे चारे की उपयोगिता के बारे में बताया गया। हरे चारे में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है जो पशुओं के ग्याभिन होने में सहायक है। इसी कड़ी में साइलेज बनाने और इसकी उपयोगिता भी पशु पालकों को बताई गई। प्रशिक्षण शिविर के समन्वयक और सूरती भैंस परियोजना के परियोजना अधिकारी डॉ. मितेश गौड़ ने बताया कि इन शिविरों में धमानियां, तारावट आदि गांव के लगभग 100 पशुपालकों ने भाग लिया। शिविर में आए हुए सभी पशुपालकों को प्रशिक्षण मार्गदर्शिका, वर्मी बैड, स्टील टब, मिल्क कैन और एजोला बीज का वितरण किया गया। डॉ. मितेश गौड़ ने इस अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों और पशुपालकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इन प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन राज्य सरकार एवं राजुवास, बीकानेर द्वारा जारी कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखते हुए किया गया।