पशु आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय सेमीनार शुरू पशु आपदा तकनीकों को गांव-ढ़ाणी तक पहुँचाएंः कुलपति प्रो. छीपा

क्रमांक 2021                                                                                                           13 मार्च, 2018

पशु आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय सेमीनार शुरू
पशु आपदा तकनीकों को गांव-ढ़ाणी
तक पहुँचाएंः कुलपति प्रो. छीपा

बीकानेर, 13 मार्च। “पशुओं के आपदा प्रबंधन में नवीन विकास और रणनीतियां“ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार मंगलवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय में शुरू हो गई। राजुवास के पशु आपदा प्रबंधन तकनीकी केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार का उद्घाटन वेटरनरी विष्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. छीपा ने कहा कि स्थानीय परिवेष के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं से बचाव की तकनीकों का गांव-ढ़ाणी में किसानों और पशुपालकों तक पहुँचाना हमारा उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन में पशुओं को शामिल किए जाने के निर्णय के लिए आभार जताया। हमारे यहां प्राकृतिक आपदाओं से पूर्व पषुपक्षियों की आपदाओं को आहट के रूप में देखा जाता है। उन्होंने वैज्ञानिकों का आहृान किया कि वे स्थानीय विषय परिस्थितियों में आपदा प्रबंधन की सस्ती और टिकाऊ तकनीकों को स्थानीय भाषा में सम्प्रेषित करें। उद्घाटन सत्र में विषिष्ट अतिथि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई दिल्ली की एस.आर.ओ. डाॅ. मोनिका गुप्ता ने कहा कि राजस्थान सूखा और अकाल के आपदा प्रबंधन के लिए देष में अग्रणी भूमिका अदा कर सकता है। उन्होंने राजुवास के पषुआपदा प्रबंधन तकनीक केन्द्र की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि सरल आपदा प्रबंधन तकनीकों को पशुपालकों तक पहँुचाया जाना चाहिए। डाॅ. गुप्ता ने आपदा प्रबंधन को पषुचिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की आवश्यकता जताई। ह्यूमेन सोसाइटी इन्टरनेषनल (एन.जी.ओ.) के कर्नल हर्ष शर्मा ने विशिष्ट अतिथि रूप में कहा कि संगठन वर्ष 2006 से आपदाओं से बचाव और शल्य चिकित्सा कार्यों में जुटा हुआ है। सेमीनार संयोजन समिति के अध्यक्ष और वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि राजस्थान विविध जैवविविधता वाला प्रदेष है जहां अमूमन सूखे और अकाल की आपदाओं से श्रेष्ठ पषुधन को नुकसान पहुंचता है। भारत सरकार द्वारा पषु विज्ञान को आपदा प्रबंधन में शामिल करने से राज्य में सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे। सेमीनार में आपदा से बचाव की व्यूह रचना से पषुपालक लाभान्वित होंगे। पषु आपदा प्रबंधन तकनीक केन्द्र के प्रमुख अन्वेषक और सेमीनार के संयोजक डाॅ. प्रवीण बिष्नोई ने बताया कि केन्द्र वर्ष 2013 से राज्य में पषुपालकों, किसानों और बचाव एजेन्सियों के संबंधित लोगों को आपदा प्रबंधन तकनीकों के प्रषिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। नवीन तकनीकों के विकास के क्षेत्र में भी वैज्ञानिका कार्य कर रहे हैं। सेमीनार की सिफारिषों को सरकार को भिजवाया जाएगा। इस अवसर पर अतिथियों ने केन्द्र द्वारा आपदा प्रबंधन पर प्रकाषित रंगीन पुस्तिका का विमोचन किया। वेटरनरी विष्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. हेमंत दाधीत ने सभी का आभार व्यक्त किया। डाॅ. प्रतिष्ठा शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। उद्घाटन सत्र में राजुवास के डीन-डायरेक्टर, फैकल्टी सदस्य और छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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