पशुधन व कुक्कुट प्रबंधन से आय बढ़ाने पर राष्ट्रीय सेमीनार सम्पन्न : “अनुसंधान नतीजों को किसानों तक पहुँचाकर जागरूक करना होगा”: कुलपति प्रो. छीपा

क्रमांक 1874                                                                                                                                         10 फरवरी, 2018

पशुधन व कुक्कुट प्रबंधन से आय बढ़ाने पर राष्ट्रीय सेमीनार सम्पन्न
अनुसंधान नतीजों को किसानों तक पहुँचाकर
जागरूक करना होगाः कुलपति प्रो. छीपा
127 कृषकों के साथ वैज्ञानिकों का हुआ संवाद

बीकानेर, 10 फरवरी। नेशनल ब्यूरो आॅफ एनीमल जेनेटिक्स रिसोर्सेज के सौजन्य से “कृषको की आय वृद्धि के लिए पशुधन एवं कुक्कुट विविधता के प्रबंधन“ विषय पर वेटरनरी विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय सेमीनार में शनिवार को राउण्ड टेबल काॅफ्रेंस में देष के प्रख्यात वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों ने शिरकत की। सेमीनार में जिले के 127 किसान-पशुपालकों के साथ वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। सेमीनार के समापन समारोह में वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा और कामधेनू विष्वविद्यालय, गुजरात के कुलपति प्रो. पी.एच. वाटलिया ने सेमीनार में लीड पेपर, बेस्ट ओरल प्रजेन्टेशन व पोस्टर प्रजेन्टेशन करने वाले वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। सेमीनार के संयोजक प्रो. जी.सी. गहलोत ने बताया कि तीन दिवसीय सेमीनार में तीन तकनीकी सत्रों में देष के विभिन्न प्रांतों से आए प्रख्यात वैज्ञानिकों और विषय विषेषज्ञों ने 17 लीड पेपर, 45 ओरल प्रजेन्टेषन और 149 पोस्टर का प्रजेन्टेशन किया। सेमीनार के समापन सत्र के मुख्य अतिथि कामधेनू विश्वविद्यालय, गुजरात के कुलपति प्रो. पी.एच. वाटलिया ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री की किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने की चुनौती को पूरा करने के लिए पशुपालकों का साथ लेकर वैज्ञानिकों को उन्नत वैज्ञानिक सेवाएं और नवीन तकनीकी को खेतों तक पहुँचाना होगा। अध्यक्षता करते हुए वेटरनरी विष्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने सेमीनार में कृषक और पशुपालकों की भागीदारी को स्तुति योग्य बताते हुए कहा कि हमें अपने अनुसंधान नतीजों को उन तक पहुँचाकर जागरूक करने का कार्य भी करना होगा। सोसाइटी फाॅर कन्जरवेषन आॅफ डाॅमिस्टिक एनीमल बाॅयोडायवर्सिटी करनाल के महासचिव डाॅ. आर.के. पुन्डिर ने बताया कि यह सेमीनार अपने उद्देश्यों में सफल रही है और इसकी सिफारिशें तैयार कर नीति निर्धारकों, केन्द्र व राज्य सरकार को भिजवाई जाएगी। सोसाइटी के उपाध्यक्ष डाॅ. एम.एस. टांटियां ने बताया कि आगामी 16वां सम्मेलन करनाल में आयोजित किया जाएगा। वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि पशु जैव विविधिकरण हमारी जीवन रखा है। नितनए परिवर्तनों के अनुकूल हमें अपनी रणनीति बनानी होगी। शनिवार को आयोजित राउण्ड टेबल काॅन्फ्रेस में पेनलिस्ट रूप में प्रख्यात वैज्ञानिकों ने शिरकत कर किसानों की आय को दोगुना करने के लिए पशुधन और पोल्ट्री विविधता की रणनीति पर विचार-विमर्ष किया। डाॅ. एस.सी. मेहता ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. बरखा गुप्ता ने किया।

ओरल-पोस्टर प्रजेन्टेशन के विजेता पुरस्कृत
तीन तकनीकी सत्रों में बेस्ट ओरल प्रजेन्टेशन के लिए डाॅ. उमेश सिंह, सिमिरिन सिंह सोढ़ी, डाॅ. रेखा शर्मा और यंग साइंटिस्ट अवार्ड डाॅ. रवीन्द्र सिंह को प्रदान किया गया। पोस्टर प्रजेन्टेशन का श्रेष्ठ पुरस्कार एकता राणा, भावेश एम. प्रजापति, जयकुमार, आकांक्षा सिंह, अंकिता गुराओ, अंकिता शर्मा और अर्नव मेहरोत्रा को प्रदान किया गया।

कृषक-पशुपालक प्रष्नोत्तरी कार्यक्रम
शनिवार को सेमीनार में पहुँचे जिले के 127 कृषक और   पशुपालक  लिए प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित कर अतिथियों द्वारा विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। पषुपालन विभाग के उपनिदेषक डाॅ. सुरेन्द्र छंगाणी ने इसका संचालन किया।

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