निरोगी काया के लिए हमारी पुरातन जीवन शैली और योगासन जरूरीः श्रीनिवास मूर्ति

क्रमांक 1725                                                                                            12 सितम्बर, 2017

वेटरनरी विश्वविद्यालय में व्याख्यान
निरोगी काया के लिए हमारी पुरातन जीवन शैली
और योगासन जरूरीः श्रीनिवास मूर्ति

बीकानेर, 12 सितम्बर। भारतीय जीवन शैली और योगासन सभी बीमारियों की रोकथाम और उपचार का एक सशक्त माध्यम है। इनके परित्याग की प्रवृत्ति के कारण नित नए रोग हमारे अमूल्य जीवन को बर्बाद कर रहे हैं। ये उद्गार वेटरनरी विश्वविद्यालय में मधुमेह मुक्त भारत-आरोग्य भारती के नेशनल संयोजक श्री श्रीनिवास मूर्ति ने व्यक्त किए। मंगलवार को “देशी चिकित्सा पद्धति से स्वस्थ मानव“ विषय पर ए.बी.जी. सभागार में व्याख्यान पर श्री मूर्ति ने कहा कि प्रकृति प्रदत वस्तुओं की उपेक्षा और नित्य व्यायाम के अभाव में हम शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के शिकार हो रहे हैं। नियमित योगासन शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को व्यवस्थित कर हमें रोगाणुओं से मुक्त करते हैं। योग से व्यक्ति में आत्म विश्वास जाग्रत होता है और मन की चंचलता को रोकने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि चीनी में मौजूद फाॅस्फोरस शरीर में अपने घातक कुप्रभाव छोड़ता है। चाय, काॅफी और चीनी का उपयोग लाइलाज बीमारी का कारण बनती है। उन्होंने सरसों के तेल, तुलसी, नीम की पत्तियों के उपयोग को सबसे बेहतर बताते हुए लोहे के बरतनों में खाना तैयार करने व मिट्टी तथा तांबे के बरतनों में पेयजल की पद्धतियों को उपयोगी बताया। रोज एक घंटा योग क्रिया करने से शरीर में रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी काया के लिए योगासन को नियमित किए जाने का आह्वान किया। प्रारंभ में वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने व्याख्यान के महत्व पर प्रकाश डाला। वेटरनरी विश्वविद्यालय के डीन-डायरेक्टर, शैक्षणेत्तर और गैर शैक्षणेत्तर कर्मचारीगण व्याख्यान में उपस्थित रहे।

समन्वयक
जनसम्पर्क प्रकोष्ठ