जैविक दूध उत्पादों के प्रसंस्करण पर वेबीनार का आयोजन

जैविक दूध उत्पादों के प्रसंस्करण पर वेबीनार का आयोजन

नवानिया, 29 अक्टूबर। पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान महाविद्यालय, नवानिया, उदयपुर के जैविक उत्पाद प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा किसानों एवं पशुपालकों के लिए जैविक दूध उत्पादों के प्रसंस्करण विषय पर वेबीनार का आयोजन किया गया। वेबीनार में प्रो. (डॉ.) त्रिभुवन शर्मा निदेशक मानव संसाधन विकास, राजूवास बीकानेर ने जैविक दूध का महत्व और इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने बताया कि जैविक खेती पशुपालकों एवं पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है, इससे कम लागत में अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। इसी क्रम में महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) राजीव जोशी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि कैसे परंपरागत कृषि से जैविक कृषि की जा सकती है, उन्होंने बताया कि इस जैविक कृषि पद्धति में रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता हैं। यह पद्धति परंपरागत कृषि की तुलना में अधिक लाभदायक है। इसी के साथ उन्होंने जैविक दुग्ध और दुग्ध उत्पादों के बारे में भी पशुपालकों को विस्तार पूर्वक बताया। डॉ. विजय विश्नोई मुख्य अन्वेषक, जैविक उत्पाद प्रौद्योगिकी केंद्र ने केंद्र के विभिन्न कार्यों एवं नवाचारों के बारे में जानकारी दी। इसी क्रम में डॉ. दिनेश चव्हाण सहायक मुख्य अन्वेषक जैविक पशु उत्पाद प्रौद्योगिकी केंद्र ने पशुपालकों को जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण की पूर्ण प्रक्रिया जैसे आवेदन करना एवं इससे जुड़ी समस्याएं और उनके समाधानों के बारे में जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में डॉ. टीकम गोयल ने सभी अथितियों और पशुपालकों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस वेबीनार में 41 पशुपालकों और किसानों ने भाग लिया।
प्रभारी