चिकित्सकीय जैव अपशिष्ट मानव और जीवों के लिए घातक: कुलपति विष्णु शर्मा

क्रमांक 350                                                                                                                       6 दिसम्बर, 2019

चिकित्सकीय जैव अपशिष्ट मानव और
जीवों के लिए घातक: कुलपति विष्णु शर्मा
वेटरनरी विश्वविद्यालय में 40 वैज्ञानिकों व तकनीकी अधिकारियों का प्रशिक्षण

बीकानेर, 6 दिसम्बर। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा है कि चिकित्सकीय जैव अपशिष्ट का सही तरीके से निस्तारण करने से मानव और पशु जीवन को बचाया जा सकता है। ये अपशिष्ट संक्रमित होकर मनुष्य और पशुओं में प्राणघातक रोगों का कारण बनते हैं। कुलपति प्रो. शर्मा शुक्रवार को 40 वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और तकनीकी अधिकारियों के “पषुजैव चिकित्सकीय अपषिष्ट के प्रबंधन और निस्तारण” विषय पर एक दिवसीय प्रषिक्षण का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं को कहा कि ऐसे जैव अपशिष्ट का निस्तारण पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। प्रषिक्षण में इस बाबत सभी तकनीक और प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। वेटरनरी काॅलेज के पशु जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर, केन्द्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान, भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्, बीकानेर, केन्द्रीय शुष्क बागवान संस्थान के वैज्ञानिकों व तकनीकी अधिकारी शामिल हुए। वेटरनरी विश्वविद्यालय की प्रमुख अन्वेषक एवं प्रशिक्षण संयोजक डाॅ. रजनी जाशी ने बताया कि जैविक अपशिष्टों का सुरक्षित निपटान नहीं करने से मनुष्य, पशु और पर्यावरण को गंभीर खतरा हो सकता है। वेटरनरी महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. राकेष राव ने कहा कि जैव अपशिष्ट का निस्तारण स्वच्छता अभियान का ही एक हिस्सा है। इसके दुष्परिणाम से मानव और जीव जगत प्रभावित होता है। प्रशिक्षण प्रतिभागियों केा केन्द्र के द्वारा बनाए गए आॅडियों विजुएल माॅडल का भी अवलोकन करवाया गया। केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी दी गयी। राजुवास के प्रो. ए.के. कटारियां ने जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट से होने वाले घातक परिणाम व उनसे बचाव के बारे में बताया। प्रशिक्षण में डाॅ. मनोहर सेन और डाॅ. पंकज मंगल ने पशु जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट के निस्तारण के लिए काम में आने वाली तकनीकों का प्रायोगिक प्रदर्शन किया। प्रषिक्षण के अंत में विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक प्रो. आर.के. सिंह एवं अधिष्ठाता प्रो. राकेश राव ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

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