ग्राम-2017 में राजुवास को जाजम-चैपाल का जिम्मा वेटरनरी विश्वविद्यालय के उन्नत नस्ल के पशु-पक्षियों और पशुपालन तकनीकों का होगा प्रदर्शनः कुलपति प्रो. गहलोत

क्रमांक 1095                                                                                                         10 मई, 2017

ग्राम-2017 में राजुवास को जाजम-चैपाल का जिम्मा
वेटरनरी विश्वविद्यालय के उन्नत नस्ल के पशु-पक्षियों और पशुपालन तकनीकों का होगा प्रदर्शनः कुलपति प्रो. गहलोत

बीकानेर, 10 मई। राज्य सरकार द्वारा इस बार कोटा संभाग के ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम 2017) में वेटरनरी विश्वविद्यालय को कृषक और पशुपालकों के लिए आयोजित की जाने वाली जाजम-चैपाल का जिम्मा सौंपा गया है। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति ने बाताया कि ग्राम 2017 में वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा उन्नत नस्ल के पालतु पशु-पक्षियों और पशुपालन तकनीकों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। बुधवार को कुलपति सचिवालय में आयोजित बैठक में ग्राम 2017 के सफल आयोजन बाबत कुलपति प्रो. गहलोत ने दिशा-निर्देश प्रदान कर कार्यों की समीक्षा की। आगामी 24, 25 व 26 मई को कोटा शहर में ग्राम 2017 का आयोजन होगा। कुलपति प्रो. गहलोत ने बताया कि तीन दिन तक चलने वाली पशुपालन, पशुचिकित्सा और डेयरी विषय पर आयोजित जाजम चैपाल में वेटरनरी विश्वविद्यालय सहित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान, बीकानेर के पशुचिकित्सा वैज्ञानिकों द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत कर पशुपालकों की समस्याओं और शंकाओं का निराकरण भी किया जाएगा। राजुवास द्वारा राज्य के अनुसंधान केन्द्रों पर पाली जा रही स्वदेशी गौवंश की राठी, थारपाकर, कांकरेज और साहीवाल नस्लों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। मुर्गी पालन के क्षेत्र में टर्की और बतख की उपयोगिता के मद्देनजर विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। अधिक अंडे और मांस देने वाले राजुवास ब्राॅयलर का प्रदर्शन भी यहां किया जाएगा। स्मार्ट फार्म टेक्नोलाॅजी के अंतर्गत राजुवास की चार उन्नत तकनीकों को दर्शाया जाएगा। हाइड्रोपोनिक्स पद्धति से हरा चारा उत्पादन की तकनीक जो कि बिना जमीन के हाइड्रोपोनिक्स तकनीक द्वारा उत्पादित जौ व मक्का का हरा चारा, गेहंू घास, धान, सेवण व गन्ने की नर्सरी का सजीव प्रदर्शन होगा। पशुओं के लिए पौष्टिक पशु आहार “अजोला“ (जल की सतह पर तैरने वाली जलीय फर्न) का उत्पादन इकाई भी यहां देखने को मिलेगी। तीसरी तकनीक के रूप में हरे चारे को साईलेज के रूप में 6 माह तक संरक्षित करने की साइलो बैग तकनीक का भी प्रदर्शन किया जाएगा। पशुओं के लिए सम्पूरक आहार के रूप में तैयार यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लाॅक तकनीक भी यहां पशुपालकों को देखने को मिलगी। बैठक में वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. जी.एस. मनोहर, वित्त नियंत्रक अरविन्द बिश्नोई, अनुसंधान निदेशक प्रो. राकेश राव, प्रसार शिक्षा निदेशक एंव ग्राम के नाॅडल अधिकारी प्रो. आर.के. धूड़िया, निदेशक क्लिनिक्स प्रो. जे.एस. मेहता और पी.एम.ई. निदेशक प्रो. आर.के. सिंह तथा प्रो. बसन्त बैस, प्रो. आर.के. जोशी और डाॅ. सी.एस. ढाका शामिल हुए।

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