कृषि एवं पशु विज्ञान मेले की 55 स्टाॅल में तकनीकी प्रदर्शन : नए भारत के निर्माण के लिए तकनीक खेत तक पहुँचाए: केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री शेखावत

क्रमांक 1748                                                                                                  06 अक्टूबर, 2017

कृषि एवं पशु विज्ञान मेले की 55 स्टाॅल में तकनीकी प्रदर्शन
नए भारत के निर्माण के लिए तकनीक खेत तक पहुँचाए: केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री शेखावत
पशु, फसल, फल व सब्जी प्रतियोगिता के विजेता हुए पुरस्कृत

बीकानेर, 6 अक्टूबर। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा है कि नए भारत का निर्माण करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक को किसान के खेत तक पहुंचाना होगा। श्री शेखावत शुक्रवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय में जिलास्तरीय कृषि एवं पशु विज्ञान मेले का उद्घाटन करने के बाद कृषकों, पशुपालकों, वैज्ञानिकों और छात्रों को सम्बोधित कर रहे थे। वेटरनरी विश्वविद्यालय और उपनिदेशक कृषि एवं पदेन परियोजना निदेशक आत्मा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय मेले में जिले के 2 हजार से भी अधिक किसानों ने शिरकत की। केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री ने इस अवसर पर कृषि एवं पशुपालन की प्रदर्शनी का फीता काट कर उद्घाटन किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि 1946 में बंगाल अकाल में अन्न के अभाव में लोगों को जाने गंवानी पड़ी लेकिन देश के कृषि वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों से देश अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया। उन्होंने वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने शैक्षणिक, वैज्ञानिक कार्यों के साथ-साथ प्रसार के कार्य मंे भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। भारत का किसान समझदार और सक्षम है। यदि कृषि और पशुपालन की नव तकनीक को उनके गांव या खेत में प्रदर्शित किया जाए तो वो इस पर तत्काल अमल कर लेगा अतः वे गांवों को गोद लें। राजस्थान के किसानों को समय-समय पर अकाल या अल्प वृष्टि का सामना करना पड़ता है लेकिन पशुपालन ने सदैव एक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि की आय को दोगुना करने का लक्ष्य दिया है। इसके लिए देश में सात सूत्री कार्यक्रम लागू किया गया है। कृषि लागत को कम करना, मृदा स्वास्थ्य की रक्षा, जल का अधिकतम उपयोग और कौशल विकास जैसे स्वरोजगार कार्यक्रम शुरु किये गये है। सरकार ने बून्द-बून्द सिंचाई योजनाओं पर 20 हजार करोड़ रूपये राशि का अनुदान घोषित किया है। उन्होंने पशुचिकित्सा वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे वैदिक काल से चले आ रहे पशु नस्ल संवर्द्धन कार्यों को एक चुनौति के रूप में लेकर आगे बढ़ेंगे तो खुशहाली आयेगी। श्री शेखावत ने कहा कि देश के निमित सप्ताह में 2-4 घंटे अवश्य लगाएं। इससे आप देश में बदलाव के साक्षी बनेंगे और आत्मगौरव का अवसर मिलेगा। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शेखावत ने वेटरनरी विश्वविद्यालय की स्थापना के अल्पकाल में ही देश में एक विशिष्ट पहचान बनाने के लिए कुलपति, शिक्षकों और विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने मेले के माध्यम से अत्याधुनिक जानकारी देने और शिक्षा प्रसार के अन्य कार्यों की सराहना की। श्री शेखावत ने प्रदर्शनी के प्रत्येक स्टाॅल में प्रदर्शित वैज्ञानिक तकनीक, कृषि, पशुपालन उत्पादों, आदानों व उपकरणों की जानकारी ली। समारोह के विशिष्ट अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डाॅ. जे.पी. सिंघल ने कहा कि विश्व में सर्वाधिक कृषि व सिंचित भूमि और विशाल पशु संख्या वाले देश भारत का भविष्य उज्जवल है। किसान, वैज्ञानिक, किसान संगठन, विद्यार्थी और शासन के समन्वित प्रयासों और समय के साथ बदलने की जरूरत है। मेलों के माध्यम से उपयेागी और स्वदेशी तकनीक जानने और स्वावलम्बी बनने की प्रेरणा मिलती है। समारोह में वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषि और पशुपालन एक दूसरे के पूरक हैं। इस क्षेत्र में कौशल विकास और मूल्य संवर्द्धन की विपुल संभावनाएं हैं। जमीन में कीटनाशकों के दुष्प्रभावों को कम किए जाने की जरूरत है। उन्होंने किसानों से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘वन ड्राप-मोर क्राॅप’’ को अपनाने की अपील की। किसान संघ राजस्थान के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री कृष्ण मुरारी ने मेले को अत्यंत उपयोगी बताते हुए किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि कार्यों के साथ पशुपालन को जरूरी बताया। प्रारंभ में वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। मेले के संयोजक और प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. ए.पी. सिंह ने बताया कि मेले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 6 संस्थानों सहित विभिन्न विभागों और कृषि विश्वविद्यालय, कृषि आदानों और उपकरणों के 60 स्टाॅल में तकनीक व वैज्ञानिक रीति-नितियों का प्रदर्शन किया गया। कृषि उपनिदेशक पदेन परियोजना निदेशक आत्मा श्री बी.आर. कड़वा ने आत्मा की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उद्घाटन समारोह में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री शेखावत और अतिथियों ने वेटनरी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रकाशित ‘‘प्रगतिशील पशुपालक: नवाचारों से आई खुशहाली’’ पुस्तक व ‘‘पशु पालन के नये आयाम’’ मासिक प्रकाशन के ताज अंक का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. मनीषा माथुर ने किया। समारोह में श्री सत्यप्रकाश आचार्य, सहीराम दुसाद, सुरेन्द्र सिंह राठौड़, पूर्व सभापति अखिलेश प्रताप सिंह, श्री अनिल शुक्ला विश्वविद्यालय के डीन डायरेक्टर और विद्यार्थियों ने भी शिरकत की।

किसान-पशुपालक और वैज्ञानिक संगोष्ठी

मेले के अवसर पर किसान पशुपालक और वैज्ञानिक संगोष्ठी में मूंगफली अनुसंधान निदेशालय जूनागढ़ (गुजरात) के निदेशक डाॅ. राधाकृषणन टी., केन्द्रीय शुष्क बागवानी अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. धूरेन्द्र सिंह व डाॅ. श्रवण हलधर, काजरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. बीरबल मील, केन्द्रीय भेड़ व ऊंन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डाॅ. ए.के. पटेल, आत्मा के परियोना निदेशक श्री बी.आर. कड़वा, उप परियोजना निदेशक एम.एल. गोदारा ने व्याख्यान प्रस्तुत किये।

पशु, फसल, फल व सब्जी की प्रतियोगिताओं के विजेता हुए पुरस्कृत

मेले के समापन पर वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा और केन्द्रीय भेड़ व ऊन अनुसंधान संस्थान के प्रभाग निदेशक डाॅ. ए.के. पटेल ने प्रतियोगिता के विजेताओं को नकद राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मेले में आयोजित प्रदर्शनी, स्टाॅल में स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय को प्रथम, दिशा आॅर्गेनिक सांईस इंडस्ट्री को द्वितीय और कृष्णा सोलर पावर फैन्सिंग को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। मूंगफली फसल प्रतियोगिता में रेवन्तराम प्रथम, मनोज द्वितीय व राकेश तृतीय रहे। बाजरे में मनोज प्रथम, तेजाराम द्वितीय व सहीराम तृतीय रहे। ग्वार फसल में मनोज प्रथम व रेवन्तीराम द्वितीय व सुभाष तृतीय रहे। पांच अन्य कृषकों प्रोत्साहन पुरस्कार दिये गये।
पशु प्रदर्शनी के उष्ट्र वर्ग में नर वयस्क पशु में इमरान के ऊंटों ने तीनों पुरस्कार हासिल किए। भेंड़ वंश की वयस्क नर समूह में रमेश कुमार प्रथम, रणजीत द्वितीय व ओम प्रकाश शिवलाल गोदारा तृतीय स्थान रहे। भैंस वंष (बछिया) में प्रथम ओमप्रकाष, द्वितीय बिरमा, तृतीय ओमप्रकाष, चतुर्थ सुमन कड़वासरा भैंस वंष (वयस्क मादा) प्रथम कैलाषचन्द्र द्वितीय चुन्नीलाल बेनीवाल, तृतीय श्रीराम बिष्नोई, चतुर्थ ओमप्रकाष, अष्व वंष (वयस्क नर) मारवाड़ी में प्रथम संस्करण दान, द्वितीय भवानी सिंह, तृतीय सुषीर सिंह भाटी, मारवाड़ी मादा (अष्व वंष) में प्रथम महेन्द्र, द्वितीय संजय जैन, तृतीय बलकरण सिंह मारवाड़ी अष्व (बछेरा/बछेरी) में प्रथम मयंक भाटी, द्वितीय संस्करण दान, तृतीय प्रदीप सिंह, चतुर्थ भवानी सिंह, वयस्क गाय (देषी) में प्रथम विरेन्द्र बिष्नोई, द्वितीय मगन लाल, तृतीय राजू खां, चतुर्थ नसीर बन्धियाकृत स्वदेषी गौवंष (नर) अब्दुल गनी, द्वितीय मुस्ताक, तृतीय लियाकत अली, नुकरा अष्व वंष (नर) में प्रथम सुषीर सिंह भाटी, द्वितीय सुषीर सिंह भाटी, तृतीय गुरनाम सिंह संकर गौवंष (मादा) में प्रथम नवीन तँवर, द्वितीय भवानी सिंह, तृतीय राजू खां, ब्रजवल्लभ, चतुर्थ राजू खां बकरी वंष (वयस्क नर) में प्रथम नूर अली, हासम अली, द्वितीय नूर अली व नवाब अली, तृतीय सिकन्दर खां व सहीराम, चतुर्थ महेन्द्र बन्धियाकृत बकरा वंष में प्रथम नूर अली व नेक रमजान, द्वितीय नूर अली तृतीय अनी सुर्रहमान विजेता रहे। बकरी वंश (वयस्क मादा) में प्रथम नूर अली, द्वितीय सुनीता, तृतीय में अनवर हुसैन व चतुर्थ में मोहम्मद अली रहे। संकर गौ वंश (बछड़ा/बछड़ी) में मोहन पुरोहित प्रथम, गफार अहमद गुर्जर द्वितीय, करणसिंह व प्रदीप सिंह तृतीय व महावीर सिंह चतुर्थ रहे। संकर गौ वंश (बछिया) में मोहन पुरोहित व द्वितीय मनमोहन व्यास रहे। संकर गौ वंश (वयस्क नर) में सीताराम प्रथम, अयूब द्वितीय, करणवीर सिंह तृतीय व अशोक पूनिया चतुर्थ रहे। भेड़ वंश (मादा) में अब्दुल गनी प्रथम रहे।

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