अश्व प्रजनन के क्षेत्र में नवानियाँ पशुचिकित्सा महाविद्यालय के बढ़ते कदम

अश्व प्रजनन के क्षेत्र में नवानियाँ पशुचिकित्सा महाविद्यालय के बढ़ते कदम

मारवाड़ी नस्ल के अश्व अपनी स्वामी भक्ति व वैभव के लिए संसार.भर में जाने जाते है द्य मारवाड़ी नस्ल के अश्व के प्रति उदयपुर के पशुपालकों के बढ़ते रुझानों के दृष्टिगत दक्षिण राजस्थान के सबसे बड़े पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालयए नवानियाँए वल्लभनगर में मारवाड़ी अश्व नस्ल सुधार चलाया जा रहा है । अश्व प्रजनन के क्षेत्र में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सेवाएँ दे चुके विशेषज्ञ डॉ दिनेश कुमारए नवानियाँ स्थित महाविद्यालय में अपनी सेवाएँ नियमित रूप से दे रहें हैं । महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रोफेसर राजीव कुमार जोशी ने बताया कि वर्षा ऋतू उपरांत का यह समय अश्व प्रजनन के लिए अनुकूल माना जाता है द्य अश्वपालक अपनी घोड़ियों को मारवाड़ी घोड़े के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान हेतु ताव के तीसरे या पांचवें दिन महाविद्यालय ला सकते हैं । पशु मादा रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ मितेश गौड़ ने बताया कि राष्ट्रीय अश्व अनुसन्धान केंद्र के साथ करार के चलते उच्च कोटि के मारवाड़ी नस्ल के अश्वों का हिमकृत वीर्य विभाग में कृत्रिम गर्भादान हेतु उपलब्ध है । मादा अश्वों के रोग एवं बांझपन सम्बन्धी उपचार व शल्यचिकित्सा की सुविधा भी महाविद्यालय में उपलब्ध है ।

प्रभारी