अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् द्वारा बाबा अम्बेडकर निर्वाण दिवस पर वेटरनरी विश्वविद्यालय के 21 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का किया सम्मान सामाजिक विषमताओं को जड़ से समाप्त करेंः कुलपति प्रो. छीपा

क्रमांक 1792                                                                                                                               6 दिसम्बर, 2017

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् द्वारा बाबा अम्बेडकर निर्वाण दिवस पर
वेटरनरी विश्वविद्यालय के 21 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का किया सम्मान
सामाजिक विषमताओं को जड़ से समाप्त करेंः कुलपति प्रो. छीपा

बीकानेर, 6 दिसम्बर। बाबा डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के निर्वाण दिवस पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् महानगर इकाई और राजुवास के संयुक्त तत्वावधान में वेटरनरी विश्वविद्यालय के 21 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का अभिनंदन किया गया। वेटरनरी आॅडिटोरियम में बुधवार को अभिनंदन समारोह का आयोजन राजुवास की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के अध्यक्ष डाॅ. सौरभ सिंह सिंघल, छात्र संघ महासचिव चन्द्रपाल सिंह एंव महाविद्यालय की उपाध्यक्ष ऊषा मीणा द्वारा किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा ने कहा कि बाबा साहब अम्बेडकर ने देश में सामाजिक विषमताओं को मिटाने के लिए आजीवन समरसता के लिए कार्य किया। हमें मिलकर पीड़ादायक सामाजिक विषमताओं को जड़ से समाप्त करने के लिए सचेष्ट होकर कार्य करना है। उन्होंने विद्यार्थियों की पहल पर मंत्रालयिक कर्मचारियों के सम्मान समारोह को एक सकारात्मक सोच और सेवाभाव से ओत-प्रोत बताया। उन्होंने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कार्मिक प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी है जिनको इस सम्मान से प्रेरण मिलेगी। समारोह की अध्यक्षता करते हुए वेटरनरी काॅलेज के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि बाबा साहब ने भारतीय संविधान के निर्माण और सामाजिक विषमताओं को दूर करने के लिए राष्ट्र निर्माण में अपना महŸाी योगदान दिया। हमारे लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में इतिहासवेŸाा श्री जानकी नारायण श्रीमाली ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल चेतना “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” में निहित है। हजारों साल की भारतीय संस्कृति के प्रत्येक काल खण्ड में समन्वयवादी और सामाजिक समरसता देखने को मिलती है। श्रीमाली ने कहा कि एक हजार साल तक विदेशी आक्रमणों के कारण समाज ने बर्बरता झेली है और हमारी मूल शिक्षा पद्वति और आर्थिक व्यवस्था नष्ट की गई। इससे समाज में भेदभाव, छूआछूत और परस्पर असमानता के बीज थोपी गई शिक्षा पद्वति ने बो दिए। समाज का सुधार समाज ही कर सकता है। देश में सामाजिक समरसता की जरूरत है। हम अपने उच्च जीवन मूल्यों को सहेज कर संस्कृति के श्रेष्ठ विचारों से समाज में परिवर्तन ला सकते है। विशिष्ट अतिथि रूप में समाज सेवी शिवदान मेघवाल ने बाबा अम्बेडकर के संघर्षमय जीवन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए देश में उनके द्वारा किये गए कार्यों पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। अतिथियों ने समारोह में सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को माल्यार्पण कर शाल ओढ़ाकर अभिनंदन पत्र प्रदान किए। समारोह में बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्य और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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